भारत में घुसपैठ कर फंस गया चीन

कभी-कभी कमजोर दिखना भी कामयाबी दिलाता है। आज देश में चीनी घुसपैठ को लेकर लोग सरकार से नाराज हैं, लेकिन देखा जाए तो चीन अपनी कोशिश में नाकाम रहा है और उसकी खीज बढ़ती जा रही है.china

हिंदीडॉट वनइंडिया डॉट इन के नवीन निगम की रिपोर्ट

दौलतबेग में पांचवां तम्बू खड़ा करना उसकी इसी खीज का सबूत है. विश्व राजनीति में भारत ने साबित कर दिया है कि शतरंज जैसे दिमागी खेल की खोज भारत ने की थी चीन ने नहीं. चीन ने अपने एक कदम से यूरोप और नाटो देशों की सहानुभूति भारत की तरफ कर दी.

ध्यान रहे आज भी विश्व में सबसे बड़ी शक्ति नाटो ही है.

इसी के साथ विश्व में यह भी साफ हो गया कि चीन एक जिम्मेदार देश नहीं है और छोटी-छोटी महत्वाकांक्षाओं में वह बह जाता है। चीन ने यह कदम भारत की चीन सीमा पर पिछले कुछ वर्षों में की गई तैयारियों को रोकने के लिए उठाया था.

वियतनाम में तेल खोज के लिए जब दक्षिण चीन सागर में भारत की कंपनी ओएनजीसी ने काम शुरू किया तो चीन ने भारत को धमकाने की कोशिश की लेकिन भारत के पलटकर जवाब देने से वह तिलमिला गया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि चीन का कुछ द्वीपों को लेकर इसी तरह का विवाद जापान के साथ भी चल रहा है.

सच पूछिए तो चीन अब अपनी ही चाल में फंस गया है, अब न तो वो पीछे हट सकता है और न हीं आगे बढ़ सकता है, क्‍योंकि अगर पीछे हटा तो विश्‍व प्‍लेटफॉर्म पर उसकी खिल्‍ली उड़ेगी और अगर आगे बढ़ा, तो बहिष्‍कार मिलेगा। आइये जानते हैं कि चीन की हरकत भारत को क्या फायदा पहुंचा सकती हैं और चीन के इस कदम से उसे क्या घाटा उठाना पड़ सकता है.

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