‘भावाशेष’ पर चर्चा, सिनेमा में बिहार की छवि पर गोष्ठी

डॉ.कुमार अरुणोदय की पुस्तक ‘भावाशेष’ के लोकार्पण के बाद आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव ने कहा कि ‘भावाशेष’ काव्य एवं संस्मरण संग्रह समाज, साहित्य एवं अध्यात्म की त्रिवेणी है.

भावाशेष का लोकार्पण

भावाशेष का लोकार्पण

इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में बिहार राज्य गीत के रचनाकार सत्यानारायण ने कहा कि ‘भावाशेष’ में डॉ. कुमार अरुणोदय की लेखकीय क्षमता पठनीय एवं रोचक है.

इस समारोह का आयोजन सिनेयात्रा एवं हमें भी पढाओ ने मिल कर किया था.

साहित्यकार डॉ. मिथलेश कुमारी मिश्र ने लेखक से यह आशा जाहिर कि वह अपनी कलम की गति को निरंतर जारी रखें. इस मौके पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मलेन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि लेखक कुमार को हम जिस रूप में जानते रहे हैं उस लिहाज से इनकी यह कृति मुझे चकित करती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह पुस्तक जीवन से साक्षात्कार कराता है. जबकि कवयित्री डॉ. शन्ति जैन ने भावाशेष को एक सारगर्भित कृति बताया.

भावाशेष का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने की है.

कार्यक्रम की दूसरी कड़ी सिने संगोष्ठी में भारतीय सिनेमा में बिहार की छवि पर वरिष्ठ फिल्म समीक्षक आलोक रंजन ने कहा कि भारतीय सिनेमा में बिहार की उपस्थिति चिंताजनक है. इस मौके पर युवा फिल्मकार रविराज पटेल ने कहा कि बिहार में सेंसर बोर्ड की जगह फिल्म निर्माताओं को सेन्स बदलने की आवश्यकता है, अच्छा होता कि यह प्रयास किसी फिल्म प्रशिक्षण संसथान के लिए होता.

इस मौके पर गीतकार सत्यनारायण, सिनेयात्रा के अध्यक्ष आर. एन . दास, डॉ. कुमार अरुणोदय, निर्माता निर्देशक किरणकान्त वर्मा, अभिनेता सुमन कुमार, डॉ. मनीषा प्रकाश, रश्मि अभय ने भी संबोधित किया जबकि मंच का सफल संचालन कवयित्री डॉ. सविता सिंह नेपाली ने किया.

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