मनमोहन की विदाई की तैयारी

कोलगेट जांच की आंच में झुलसने के आसार, मीरा कुमार पर पार्टी खेलेगी दांव, तमाम दागी, जनाधार विहीन और उम्रदराज नेताओं को किनारे लगाने की रणनीति, राहुल ब्रिगेड लेगी स्थान.manmohan

देशपाल सिंह पंवार

आसमानी पारा जितना चढ़ रहा है उससे ज्यादा इस समय पारा गरम कांग्रेस के भीतर है। पवन बंसल और अश्विनी कुमार की विदाई आखिरी नहीं है। उनके टिकट भी कटेंगे। साथ ही इस तपिश में कुछ और पुराने व घाघ नेता भी झुलसने वाले हैं। दरअसल आखिरी पारी का डर पार्टी के भीतर इतना ज्यादा है कि कुछ और चेहरों पर अगले कुछ ही दिनों में गाज गिरने वाली है। ऐसे चेहरे भले ही वफादार हों पर जनाधार विहीन और दागदार चेहरों को छांटा जाएगा। इनके स्थान पर राहुल ब्रिगेड के और फेस आगे लाने की रेस होने वाली है।

आजकल रोजाना दस जनपथ में भावी रणनीति बन रही है। कितने विकेट गिरेंगे ये दो बड़ों के अलावा कोई नहीं जानता। हां खबर ये जरूर निकलकर आ रही है कि घेरे में मनमोहन सिंह भी हैं। जिनकी कप्तानी पर भी सवालिया निशान हैं और कोयले की कालिख अलग से लगती नजर आ रही है। दो राज्यमंत्री और पीएमओ से तो पूछताछ चल ही रही है। कुछ कांग्रेसी नेता तो यहां तक कह रहे हैं कि अगली बार 15 अगस्त को लाल किले पर तिरंगा फहराने का मौका मनमोहन सिंह को नहीं मिलने जा रहा है। पार्टी को लग रहा है कि अब अगर मनमोहन सिंह रहे तो फिर काररी हार से नहीं बचाया जा सकता। लिहाजा थिंक टैंक की सोच यही है कि अगर पीएम समेत 2-4 बड़ों को हटाया भी जाता है तो घपलों-घोटालों में गले तक फंसी पार्टी को सांस आ सकती है। लगे हाथ विपक्ष के वार भी थोथरे हो जाएंगे।

वैसे ये तय तो 2009 में ही हो गया था कि मनमोहन सिंह आखिरी पारी खेलेंगे। पर उनकी कप्तानी में टीम इतना खराब खेलेगी, इसका गुमान किसी को नहीं था। आए दिन के घपले-घोटालों और बेलगाम महंगाई की वजह से सरकार की तो किरकिरी हो ही रही थी साथ ही पार्टी को भी फजीहत झेलनी पड़ रही थी। कर्नाटक के नतीजों ने पार्टी को ये सोचने को मजबूर किया है कि अब कोई और नेता भ्रष्टाचार में फंसना नहीं चाहिए और जो दागी हैं उनसे निजात पानी चाहिए। जिस तरह बीजेपी दिल्ली पाने की आस में राज्यों को खोती जा रही है उससे ही कांग्रेस को फिर से ये आस जगी है कि अगर घर को ठीक कर लिया गया तो अगली बार सरकार बनने की स्थिति आ सकती है। इसी वजह से पीएम के चहेतों बंसल व अश्विनी को हटाया भी गया और पीएम को भी संकेत दिए गए कि वो कोलगेट में बेदाग नहीं हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के पीछे भी 10 जनपथ समर्थक लाबी ही खड़ी है। राजनीतिक विश्लेषक इसे राहुल गांधी को आगे लाने की तैयारी मान रहे हैं पर कांग्रेस से मिल रही अंदरूनी खबरों के मुताबिक अगले चुनाव के बेहतर नतीजों के वक्त ही इस पर फैसला होगा। हां जिन नेताओं की आगे विदाई होने वाली है उनमें वो नेता शामिल किए जाएंगे जिन पर दाग भी हैं और जनाधार भी नहीं। साथ ही उम्रदराज नेताओं को भी और किनारे करने की पूरी तैयारी है। इन सबका स्थान राहुल ब्रिगेड लेगी।

जहां तक मनमोहन सिंह का सवाल है तो बीजेपी उनके भी इस्तीफे की मांग पर अड़ी है। पर मीडिया में जितना विरोध बीजेपी की तरफ से नहीं है उससे ज्यादा खबरें कांग्रेसी ही पीएम के बारे में मुहैया करा रहे हैं। कोलगेट कांड की जांच की आंच पीएम के दामन तक पहुंचेगी इसका विश्वास कांग्रेसी ही मीडिया को दिला रहे हैं। वैसे भी 2006 से 2008 तक कोयला प्रभार पीएम के पास ही था। सीबीआई की जांच से ही राज उठेंगे। फिलहाल जो सीन है उसमें सोनिया की इमेज बनाने की कीमत मनमोहन सिंह को चुकानी होगी और वो भी जल्दी। इसी वजह से ये माना जा रहा है कि पीएम अब चला-चली की बेला में हैं। इंतजार सही टाइमिंग का है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक मीरा कुमार को कुछ वक्त के वास्ते आगे लाने की तैयारी है। पार्टी को लग रहा है कि अगर छोटी गलतियों पर बड़े नपेंगे तो जनता के भीतर बेहतर संदेश ही जाएगा। भाजपा में भी तमाम दागी हैं लिहाजा उन पर वार करने में भी आसानी होगी। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में कुछ बड़े धमाके केंद्र व कांग्रेस की राजनीति में होने जा रहे हैं ये तय है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*