मानव शृंखला के नाम पर मानवीय पहलू को दरकिनार कर महिमामण्डन में जुटे मुख्यमंत्री : तेजस्‍वी यादव

पूर्व उपमुख्‍यमंत्री व राजद नेता तेजस्‍वी यादव ने 21 जनवरी को आयोजित दहेजप्रथा और बाल विवाह के विरुद्ध मानव श्रृंखला पर मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा और उन पर कड़ाके की ठंड में लाखों सरकारी कर्मचारियों और स्कूली बच्चों को परेशान करने का आरोप लगाया. तेजस्‍वी सोशल साइट ट्विटर के जरिये लिखा कि माननीय मुख्यमंत्री अपने महिमामण्डन के लिए दहेजप्रथा और बाल विवाह के विरुद्ध मानव श्रृंखला के नाम पर लाखों सरकारी कर्मचारियों और स्कूली बच्चों को कड़ाके की ठंड में परेशान कर रहे हैं.

नौकरशाही डेस्‍क

उन्‍होंने लिखा कि एक ओर नियोजित शिक्षकों को सरकारी मानदेय की लंबित माँग को नकारे हुए हैं. दूसरी ओर उन्हीं के श्रम व समय का दुरुपयोग अपने महिमाण्डन के लिए करते हैं. शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, विकास, कानून व्यवस्था की लचर स्थिति पर एकदम बेबस और लाचार हो जाते हैं, पर हवा हवाई मुद्दे उठा अपना चेहरा चमकाने के लिए करोड़ों रुपये का राजस्व स्वाहा कर देते हैं. तेजस्‍वी ने कहा कि दहेज विरोधी और बाल विवाह कानून तो पहले से बने थे. लेकिन विगत 13 वर्ष में कड़ाई से लागू क्यों नहीं हो सके, इस पर मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए. अब झूठा श्रेय लूटने के लिए कयावद कर रहे है?

उन्‍होंने कहा कि इस कुहासे की धुंध में आपका प्रचार द्वारा चमकाया चेहरा व्यथित जनता को नहीं दिखेगा नीतीश जी, इसलिए जब ठंड थोड़ा कम हो जाए तब यह प्रचार करिएगा. ताकि धुँध छँटने पर आपका चेहरा दिख सकें. इससे स्कूली बच्चों को भी सहूलियत होगी. आपसे आग्रह है कि नादान स्कूली बच्चों और कर्मचारियों का ख़्याल रखिए. हम इसके विरोध में नहीं है लेकिन सिर्फ़ अपना चेहरा चमकाने के लिए आप मानवीय पहलू को भूल जाएँ इसके पक्षधर नहीं है.

गौरतलब है कि पिछली साले भी नीतीश कुमार की नेत्तव वाली महागठबंधन की सरकार ने शराब बंदी को लेकर मानव श्रृंखला बनाई थी. इसमें सरकार की ओर से 2 करोड़ से ज़्यादा लोगों के शामिल होने का दावा किया गया था. आम लोगों के अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद अध्यक्ष लालू यादव से लेकर सरकार के तमाम बड़े मंत्री और अधिकारी इस मानव श्रृंखला में शामिल हुए थे. साथ ही दूसरे दलों के नेताओं ने भी शिरकत की. 11 हज़ार किलोमीटर लंबी इस मानव श्रृंखला का मकसद नशा मुक्त बिहार बनाने को लेकर लोगों को जागरूक करना था.

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