मीडिया और सिविल सोसाइटी मिल करें काम तो हो समाज का भला

अनुग्रह नारायण सिन्हा संस्थान के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर ने कहा है कि समय भले बेहद अनुकूल न हो, लेकिन मार्ग भी यहीं से निकलेगा। मीडिया में राजनीतिक खबरों की बहुलता रहती है, लेकिन जन मुद्दे के लिए जगह मिल सकती है। ज़रूरत है कि सिविल सोसाइटी और मीडिया को मिलजुलकर काम करने की।
दिवाकर मीडिया और सिविल सोसाइटी में समन्वय के विषय पर संस्थान में आयोजित परिचर्चा में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
 इसका आयोजन रांची के मंथन युवा संस्थान ने नेशनल फाउंडेशन फ़ॉर इंडिया के साथ मिलकर किया था।
विषय पर विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने अपने-अपने विचार रखें। मौके पर दिल्ली एनएफआई की प्रोग्राम ऑफिसर मिनी कक्कड़ ने कहा कि  मीडिया और सिविल सोसायटी का जो कार्य क्षेत्र है वो अस्पष्ट है। सिविल सोसायटी, पत्रकारों के लिए आज सबसे बड़ा न्यूज़ का स्रोत है, लेकिन उनके बीच सही समन्वय नहीं है। इसकी वजह कर जनसरोकार की खबरें आंकड़ों के साथ नहीं आ पाती हैं।
मंथन के सुधीर पाल ने कहा कि अनौपचारिक मंच के साथ साथ संवाद का माहौल बनाना ज़रूरी है। मीडिया का दायरा बहुत बड़ा है और समाजहित में उनकी भूमिका भी। आज अखबारों में तथ्यात्मक रिपोर्ट गिनी चुनी हीं रहती हैं। इस लिहाज से सिविल सोसायटी और मीडिया दोनों को ही बिहार के परिपेक्ष में कुछ मुद्दों का चयन करके उन्हें नियमित रूप से काम करें।
वहीं वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानवर्दन मिश्र ने ग्रामीण पत्रकारिता को ही मीडिया संस्थान की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि सिविल सोसायटी मुद्दों से जुड़े आंकड़ों को मीडिया के साथ साझा करें ताकि उसे सरकार की नज़रो तक लाया जा सके।
परिचर्चा में वरिष्ठ जावेद इक़बाल, नरेंद्र, कंचनबाला, पुष्य मित्र, ज्योति स्पर्श, सीटू तिवारी, रजनी, मालती देवी, सैयद शहरोज कमर, बालेंदु शेखर, इबरार अहमद रज़ा, पवन कुमार समेत कई लोगों ने विचार रखे।
 मंथन-एनएफआई पिछले दशक से जन सरोकार के मुद्दों की वकालत करते आये हैं।कभी ग्रासरुट के पत्रकारों के साथ तो कभी सिविल सोसाइटी के साथ सामंजस्य बैठा कर ,एक दुसरे से अपने अनुभव साझा करते आएं हैं। इसी क्रम में  इस कार्यक्रम के तहत कुछ वरिष्ठ और मध्य स्तर के पत्रकार और सिविल सोसाइटी के कुछ प्रतिभागियों के साथ एक समन्वय स्थापित करने की कोशिश की गयी है।  मकसद है मीडिया विशेषज्ञों, गैर सरकारी संगठनों, सेवा प्रदाताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद  की प्रक्रिया को  सरल बनाना; साथ ही सिविल सोसाइटी और मीडिया साझेदारी  तथा  मीडिया, एनजीओ और कार्यकर्ताओं के बीच नई साझेदारी बनाने के लिए प्रयास ।

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