मुलायम की नसीहत का ऐसा हुआ असर

यूपी की प्रशासनिक व्यवस्था पर मुलायम यादव की तल्ख़ टिप्पणी का असर दिखने लगा है.कई प्रभावशाली नौकरशाहों के पर कतरे गये हैं.कुछ दिनों में कई और धरासाई होने वाले हैं.

लखनऊ से हमारे ब्यूरो चीफ अनुराग मिश्र बता रहे हैं कि मुलायम की अनुभवी आंखों ने समय रहते अखिलेश यादव को चेतने की नसीहत दे दी है इसलिए अभी और बदलाव भी होंगे.

दरसल सपा प्रमुख एक ही प्रशासनिक अधिकारी को कई विभाग दिये जाने से नाराज बताये जा रहें है इसके अतिरिक्त सपा प्रमुख पंचम तल के भी कुछ अधिकारीयों की कार्यप्रणाली से खासे नाराज़ हैं.
मुलायम की इस नसीहत के बाद बदलाव की कुछ झांकी दिखने लगी है. आने वाले दिनों में निश्चित तौर पर और दिखेगी.फिलहाल कुछ प्रभावशाली नौकरशाहों को अखिलेश ने ठिकाने लगाना शुरू कर दिया है.

इनमें से एक अनिल कुमार गुप्ता हैं.गुप्ता एक या दो नहीं पांच महत्वपूर्ण पदों पर काबिज थे.ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव, औद्योगिक और आधारभूत विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के अध्यक्ष के अलावा सूचना प्रोद्यगिकी विभाग के प्रधान सचिव का पद भी इनके जिम्मे ही था. गुप्ता अब शंट किये जा चुके हैं.बेचारे गुप्ता रेवेन्यू बोर्ड के सदस्य बनाये गये हैं.इस विभाग की औकात नाम मात्र की है.

राजीव कपूर थोड़े शक्तिशाली हुए हैं.अनिल गुप्ता के सारे पद राजीव को दे दिये गये हैं.राजीव पहले से तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव पहले से ही हैं.संजीव शरण जो अखिलेश सरकार की बदनामी का कारण बने हुए थे और जिन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हटाने तक की बात कही थी, उनसे भी अखिलेश सरकार ने अपना पिंड छुड़ा लिया है.इन्हें वेटिंग में डाल दिया गया है.रामा रमण भी कुछ शक्तिशाली हुए हैं. संजीव शरण की अतिरिक्त जिम्मेदारी, यानी नोएडा प्राधिकरण रामा रमण के जिम्मे लगा दिया गया है.

अभी और होंगे शंट

लेकिन मात्र इन बदलावों से भी मुलाय संतुष्ट नहीं हैं.ऐसी स्थिति में आने वाले कुछ ही दिनों में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में भारी फेरबदल हो तो उसमे कोई अत्योश्योक्ति नहीं होगी.स्वयं मुख्यमंत्री अखिलेश ने भी सार्वजानिक रूप से ये स्वीकार किया है कि जल्दी ही प्रशासनिक व्यवस्था में काफी बड़ा बदलाव किया जायेगा.इस बदलाव का सबसे ज्यादा निशाने पर वे अधिकारी रहेंगे जो पूर्वर्ती माया सरकार में मलाईदार पद पर थे और इस सरकार में भी जोड़ तोड़ से मलाईदार पद पर बने हुए हैं. इसके अतिरिक्त सत्ता के केंद्र पंचम तल के अधिकारीयों के भी कुछ नाम है जो सरकार के निशने पर आ सकते हैं.

पर यहाँ जो अहम् सवाल है वो ये कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों आ पड़ी कि स्वयं सपा प्रमुख को सार्वजानिक रूप से राज्य कि प्रशासनिक व्यवस्था पर तल्ख़ टिप्पणी करनी पड़ी और युवा मुख्यमंत्री को निर्देशित करना पड़ा कि वो बड़े स्तर पर फेरबदल करें ? वास्तव में ये भ्रष्ट नौकरशाही बनाम भ्रष्ट राजनीत की अघोषित सांठगांठ का नतीजा है जिसमे सत्ता में बैठे कुछ अधिकारी पूरी सत्ता को ही अपने इशारो पर नचाने लगते हैं.

और पहली बार मुख्यमंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति नौकरशाही के इस खेल को नहीं समझ पता. ऐसा ही कुछ हमारे युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ हो रहा है जिनकी राजनैतिक अपरिपक्वता का फ़ायदा उठाते हुए कुछ लोग उनकी आँखों के सामने एक ऐसे प्रदेश की तस्वीर पेश कर रहे है जहाँ सब कुछ अपनी जगह पे सही है. भ्रष्ट नौकरशाही के इस खेल को भले ही अखिलेश समझने में नाकाम रहे पर मुलाय की बारीक आंखें सब देख रही हैं.

एक साल के अन्दर ही चुनाव होने है लेकिन अभी तक सरकार के खातें में कोई भी ऐसी उपलब्धि नहीं जुडी है जिसे सपा 2014 के लोकसभा चुनाव में भूना सके. ऐसे में मुलाय का अब और चुप बैठना संभव नहीं था.

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