मुसलमानों ने की थी जंगे आजादी की शुरुआत: जस्टिस समरेंद्र प्रताप

पटना हाई कोर्ट के न्याधीश समरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि मुसलमानों को इस बात के लिए स्वाभाविक रूप से गर्व करने का अधिकार है कि उन्होंने ही अंग्रेजों के खिलाफ जंगे आजादी का बिगुल फूका था. जस्टिस समरेंद्र ने यह बात इतिहास के पुस्तक के हवाले से कही.

जस्टिस समरेंद्र प्रताप ने यह बातें शनिवार को पूर्व आईएएस अफसर एमए इब्राहिमी की पुस्तक जंगे आजादी के मुस्लिम शोहदा( शहीद) के विमोचन के कार्यक्रम में कही.

इस अवसर पर बिहार के पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि ऐसे दौर में जब एक खास मानसिकता थोपी जा रही है, ऐसे में यह पुस्तक उनके लिए जवाब है जिन्होंने आजादी की लड़ाई में एक घंटा भी जेल में नहीं गुजारा लेकिन मुसलमानों की भारतीयता पर सवाल उठाते हैं.

जंगे आजादी के मुस्लिम शोहदा का विमोचन

 

पुस्तक की रचनाकार और बिहार कैडर के पूर्व आईएएस अफसर एमए इब्राहिमी ने विस्तार से अपनी पुस्तक का परिचय देते  हुए बताया कि उन्होंने पिछले पंद्रह वर्षों की अपनी मेहनत को इस पुस्तक में समेटा है. इस पुस्तक का यह तीसरा एडिशन है जिसमें इब्राहिमी ने अपने रिसर्च के आधार 488 मुस्लिम शहीदों का परिचय पेश किया है. उर्दू अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में विधान परिषद के पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इस पुस्तक की तारीफ करते हुए कहा कि इब्राहिमी ने इस पुस्तक के माध्यम से जहां शहीदों के योगदान को यादगार बना दिया है वहीं उन्होंने इसके द्वारा खुद को भी अमर बना डाला है.

पूर्व विधानपार्षद गुलाम गौस ने जोर दे कर कहा कि मुर्दा कौम अपने जिंदों को भी भुला देती है और जिंदा कौम अपने मुर्दों को याद रखती है. आज इब्राहिमी साहब ने जो कारनामा अंजाम दिया है इसके लिए वह तारीफ के लायक हैं. गौस ने मुसलमानों से अपील की कि वह अपने शहीदों  के नाम पर भवन स्कूल और रोड का नाम ताल ठोक कर रखें.

उर्दू अकदामी के सचिव ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि इब्राहिमी के इस काम से आने वाली नस्लों को न सिर्फ मुसलमान शहीदों से प्रेरणा मिलेगी बल्कि इब्राहिमी के योगदान से भी उन्हें प्रेरणा मिलेगी.

उर्दू के साहित्यकार अब्दुस्समद ने इस अवसर पर कहा कि इस पुस्तक का प्रकाशन हिंदी समेत दूसरी जुबान में भी होना चाहिए.

कार्यक्रम के अंत में अनवारुल होदा ने लोगों का धन्यवाद ज्ञापन किया. इस अवसर पर फैसल सुलतान, हुस्न अहमद कादरी, ओबैदुर्रहमान समेत काफी संख्या में लोग मौजूद थे.

 

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