मुस्लिम-यादव गठजोड़: क्या हकीकत क्या फसाना

मौजूदा चुनावी अभियान में बिहार में एम-वाई समिकरण की जबर्दस्त चर्चा रही. मुस्लिम- यादव समाज युनाइट हो गये हैं.पर यह प्रयोग सचमुच कामयाब रहा इसको टेस्ट करने का दो सटीक फार्मुला है.इस फार्मुले पर मुस्लिम-यादव गठजोड़ को परखिये, कुछ इस तरह से-

अगर सारण से राबड़ी देवी जीत जाती हैं तो यह साबित हो जायेगा कि मुसलमानों ने यादवों का समर्थन दिया. क्यों? क्योंकि यहां से जद यू के मुस्लिम उम्मीदवार सलीम परवेज हैं. अगर राबड़ी जीतीं तो समझिए कि मुसलमानों ने खुद को यादवों के साथ कर लिया.

फिर यह कैसे साबित होगा कि यादवों ने मुसलमानों का साथ दिया?

इसका भी एक फार्मुला है. इसके लिए आप सीवान चलिए. यहां से राजद की मुस्लिम उम्मीदवार हिना शहाब खड़ी हैं. अगर हिना जीत गयीं तो स्वीकार करना पड़ेगा कि यादवों ने खुद को मुसलमानों के साथ कर लिया है. क्योंकि यहां से भाजपा के उम्मीदवार ओमप्रकाश यादव हैं. ओम प्रकाश यादव का हारना साबित करेगा कि यादवों ने खुद को मुसलमानों के साथ कर लिया.

एम-वाई समिकरण और गठजोड़ को परखने का इससे सटीक उदाहरण आप की नजर में कोई हो तो जरूर बताइगा.

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