मोदीजी! खुद रोइए, न गरीबों को रुलाइए, उन्हें रुलाइए जो देश को रुला रहे हैं

मामला लाइन में खड़ा होने और देश के लिए दिक्कत उठाने का भी नहीं, मामला देश को दिग्भ्रमित करने का है। वैध-अवैध और जमा नकदी नोट निकालना अच्छा है। लेकिन पूरा कालाधन क्या यही है?modi.crying

नवेंदु, वरिष्ठ पत्रकार व विश्लेषक

कालेधन धारियों की जो सेक्रेट सूचि सरकार के पास है, उसे सुप्रीम कोर्ट के मांगे जाने पर भी क्यों नहीं निकाल और सौंप रही सरकार?

बैंकों के लोन डिफाल्टर देश के बड़े धनकुबेरों को क्यों हज़ारों करोड़ की माफ़ी दी जा रही है?
जमाखोरों का धन निकलवा रहे निकलवाना ही चाहिए। ये काम तो इस प्रचंड जनादेश प्राप्त सरकार को पहले ही करना चाहिए था। विदेशों में जमा काला धन लाने का चुनावी वादा भी था, निभाना था। नहीं निभा। खुद माननीय मोदी जी ने अपने श्रीमुख से एलान किया था, हर भारतवासी के खाते में 15 लाख जमा कराएंगें। ऐसा नहीं हुआ। और ढोल ये बजाया जा रहा कि कालेधन कुबेरों पर ये सर्जिकल स्ट्राइक है।

ऐसे नहीं मिलेगी काला धन से मुक्ति
देश के लगभग एक हज़ार छंटे काला धनधारियों को लाइन हाज़िर न करवा कर सवा सौ करोड़ देशवासियों को लाइन में लगवाने से कैसे कालाधन मुक्त होगा भारत, ये समझ से परे है।

ये कुछ बड़े सरल सवाल हैं.इस देश के इनकम टैक्स विभाग के पास क्या कालाधन धारियों की सूची नहीं थी? और सूची थी तो उन्हें सिंगल आउट कर उन सभी पर अब तक उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की? नहीं कार्रवाई की तो लाखों लाख रु तनख़्वाह उठाने वाले उन निकम्मे अधिकारियों पर सरकार ने क्यों नहीं स्ट्राइक किया?
म ज़रूरतमंदों को ज़रूरत के नोट के बदले उनको काली स्याही तो लगाने में आपको बड़ा मज़ा आ रहा और आपकी अर्थ व्यवस्था मज़बूत हो रही लेकिन असल के और गिनती के बड़े काले धनधारियों के मुंह पर कालिख़ क्यों नहीं पोत रहे?

काले धन और भ्रष्टाचार की टहनी तोड़ने से कालेधन की विषबेल क्या समाप्त होगी? उसकी जड़ों और तने पर क्यों नहीं हमला कर रहे? उन्हें बचाने और बाक़ी को बर्बाद कर कालाधन ख़त्म करने का ये स्वांग ख़त्म कीजिये।

मोदी जी, बिग बुल ब्लैक मनी होल्डर की सूची देश की शीर्ष अदालत को सौंपिये और उन पर कठोर कार्रवाई करिये फिर तो प्रिय भारतवासियों को लाइन में लगने-लगाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।

राजनीतिक दलों के पास बेहिसाबी धन 69 प्रतिश

 

राजनीतिक दलों के चंदे को आरटीआइ के दायरे में लाने पर क्यों ये सरकार सुप्रीम कोर्ट से कहती है कि ऐसा न किया जाय? एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के राजनीतिक दलों के पास 69.30 फीसदी धन ऐसा है जो बेहिसाबी है।

देशभक्ति का तकाज़ा है कि पार्टियों का चंदा काला नहीं, सफ़ेद होना चाहिए ताकि काली राजनीति से देशवासी मुक्त हो सकें। इस चंदे के धंधे को भी क्यों नहीं आधारकार्ड और अन्य आईडी स्रोतों से जोड़ना चाहिये। आम लोग अपनी आय का स्रोत बताने को बाध्य हों और पोलिटिकल पार्टी नहीं, ये कैसे चलेगा! देश की राजनीति काले धन पर चलेगी तो काला ही रहने को अभिशप्त रहेगा संसदीय लोकतंत्र।
खुद रोइए मत प्रधानमंत्री जी उन्हें रुलाइए जो आज़ादी के बाद से देश को रूलाते रहे और आपके शासन में भी रुला रहे। ये तमाशा बंद करवाइए, देश आपका है और आप उसके प्रधान सेवक, सिर्फ भक्त ही नहीं समग्र व सम्पूर्ण देशवासी आपके साथ हैं…बोल मोदी हमला बोल!!

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लेखक पत्रकारिता जगत में तीन दशक से सक्रिय हैं. प्रभात खबर में स्थानीय सम्पादक रहे, मौर्य न्यूज चैनल हेड की हैसियत से जिम्मेदारी निभायी. डीडी बिहार व झारखंड के सलाहकार रहे.गर्वनेंस नाउ के बिहार हेड के रूप में सेवायें दी. फिलवक्त स्वतंत्र लेखन में रमे हैं.

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