मोदी के दो साल-2: आतंकवाद, घोटाला, काला धन, रोजगार/सारे वादे हुए बाकार

मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर जीतेंद्र सिंह गिन-गिन कर बता रहे हैं कि आतंकवाद, घोटाला,काला धन, रोजगार जैसे सभी मोर्चे पर धारासाई  होने के साथ, नेपाल से रिश्ते, दलितों के प्रति घृणा और अल्पसंख्यकों की प्रताड़ना के सिवा कुछ भी उपलब्धि नहीं.

स्केच साभार न्यू इंडियन एक्सप्रेस

स्केच साभार न्यू इंडियन एक्सप्रेस

दो साल पहले आज ही के दिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने कामकाज संभाला.वादा किया था सरकार के मुखिया सौ दिनोंके अन्दर हरव्यक्ति के खाते में 15 लाख जमा करेंग और हर वर्ष दो करोड़ लोगों को जॉब देंगे.किन्तु सवर्णों की चैम्पियन सरकार से थोडा भला अगर किसी का हुआ तो वह शक्ति के स्रोतों पर 80-85 प्रतिशत कब्ज़ा जमाये परम्परागत सुविधा भोगी वर्ग का. किसी और का नहीं. इसलिए आज आम सवर्णों,साधु-संतों तथा सवर्णवादी मीडिया-बुद्धिजीवीयों की आशा-आकांक्षा का प्रतीक बन गयी है केंद्र की मोदी सरकार.

आज इसी दिन केंद्र सरकार का मुखिया यूपी जीतने के लिए सहारनपुर की धरती पर कदम रख रही है.

यह सरकार रोजगार सृन, आंतरिक सुरक्षा, विदेश नीति, विकास हर मामले में फिसड्डी साबित हुई है.

आतंकवाद पर भावनाओं से खिलवाड़

आतंकवाद के खात्मे के नारे से सत्ता में आयी इस सरकार के माथे पर पठानकोट का आतंकी हमला का दाग लगा. हमारे जवानों को शहीद होना पड़ा पर गृहमंत्री ने हमले के कुछ देर बाद ही घोषणा कर दी कि सारे आतंकवादी मारे गये. गृहमंत्री के रूप में उन्होंने झूठा बयान दिया. जबकि उनकी घोोषणा के 72 घंटे बाद तक आतंकी हमारे जवानों की जान लेते रहे.
इतना ही नहीं सरकार के बाहर रहते डींगे हांकने वाली मोदी सरकार मसूद अजहर को भी युनाइटेड नेशन के आतंकियों की सूची में नाम डलवाने में विफल रही.

नेपाल से बुरे रिश्ते

नेपाल- नेपाल जैसा सदियों पुराना हमारा पड़ोसी देश इस तरह भारत विरोधी भावनाओं से भर गया कि वहां भारत विरोधी प्रदर्शन होने लगे. इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर गोबैक इंडिया कम्पैन तक चला. इस पड़ोसी देश से मोदी सरकार रिश्चा अच्छे करने में विफिल रही.

दलित-अल्पसंख्यक के प्रति घृणा
इन्हीं दो सालों में लव जिहाद, बीफ विवाद, घर वापसी जैसी घटनाओं के साथ जहां अकलाक की हत्या की गयी वहीं हैदराबाद केंद्रीय विश्विद्यालय में रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या तक हुई. ये दोनों घटनायें या तो दलितों के खिलाफ थीं या अल्पसंख्यकों के. इस सरकार में सामाजिक विभाजन की लकीरें मजबूत हुई.

ब्लैक मनी

अगर बात ब्लेक मनी और भ्रष्टाचार की की जाये तो सौ दिन में काला धन लाने का गला फाड़ कर वादा करने वाली मोदी सरकार काला धन लाने की तो बात ही छोड़िये 9000 करोड़ रुपये का सफेद धन ले कर विदेश भागने वाले विजय माल्या की जाने अनजाने में मदद की. महीनों हो गये वह आज तक वापस नहीं आया.

भ्रष्टाचार

इतना ही नहीं लाल किला से चीख कर भ्रष्टाचार के खात्मे का वादा करने वाले भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार भी चरम पर है. अभी हाल ही में सिंहस्थ मेले में आला घोटाला सामने आया है जिसमें पता चला है कि 93 रुपये का मेडिकल चेकअप का आला सात हजार रुपये में खरीदने का रिकार्ड बनया गया. वहीं भाजपा शासित राज्य में व्यापम घोटाला अरबों रुपये का हुआ.

सुशासन नहीं, जंगल राज

अगर घोटाले के बजाये सुशासन की बात की जाये, जिसका खोखला डंका मोदी सरकार पीटती है तो यह जानिये कि अभी पिछले हफ्ते ही दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में कानून व्यवस्था की स्थिति पर वहां जंगल राज होने की बात कह दी. अब अदालत की बात तो हद ही है. इतना ही नहीं शासन के मोर्चे पर इस सरकार को उत्तराखंड के हाईकोर्ट से ले कर सुप्रीम कोर्ट वहा राष्ट्रपति शासन लगाने पर जितना लताड़ा और जितनी बेइज्जती की इसकी मिसाल आजाद भारत के इतिहास में नहीं मिलती

युवाओ में नाउम्मीदी

देश के युवाओं ने मोदी सरकार बनाने में जी जान लगा दिया था. उन्हें उम्मीद थी कि दो करोड़ लोगों के रोजगार में उनकी हिस्सेदारी होगी. काला धन वापस आयेगा तो लोगों में खुशहाली होगी. लेकिन युवाओ में अब आक्रोश है. इस बीच बिहार में तेजस्वी यादव के उभरते राजनीतिक विकल्प ने युवाओं को बिहार के उप मुख्यमंत्री से काफी उम्मीदें  बढ़ी हैं. युवा उनकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं. बिहार में जिस तरह से मात्र छह महीने में तेजस्वी यादव ने विकास को गति दी है उससे स्वाभाविक है कि युवा उनकी तरफ उम्मीद से देख रहे हैं.

इसी से जुड़ी अन्य खबर- लव जिहाद, घर वापसी, बीफ, योगा… कितने गिनाऊं

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लेखक एक सफल उद्यमी व सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उनसेjsinghxlri@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है

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