मोदी जी! आतंकवाद पर आपका दांव उलटा न पड़ जाये

आदरणीय सुशील मोदी जी! पटना ब्लास्ट पर आपका राजनीतिक दांव उलटा न पड़ जाये क्योंकि जांच जिस दिशा में बढ़ रही है वह अंतरधार्मिक गठजोड़ की ओर इशारा करता है.sushil.modi

इर्शादुल हक

सुशील कुमार मोदी राजनीति पर राजनीति किये जा रहे हैं. करना भी चाहिए.एक नेता को इसका हक भी है. पर हुंकार रैली बम विस्फोट पर जिस तरह मोदी राजनीति कर रहे हैं, खतरा है कि उनका दांव उलटा न पड़ जाये.

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उन्होंने रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हुंकार रैली बम विस्फोट पर घेरने की कोशिश की. बम धमाकों पर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सवाल पूछे हैं. मोदी ने कहा कि “इंडियन मुजाहिदीन (आइएम) का नाम लेने मे मुख्यमंत्री को संकोच हो रहा था इसलिए उन्होंने पुलिस के मुखिया को सामने कर दिया. लेकिन न तो मुख्यमंत्री और न ही डीजीपी ने रैली के दौरान सुरक्षा प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही पर एक भी शब्द कहना उचित नहीं समझा”.

मोदी जी, आपके इस कथन के दो भाग हैं. पहला यह कि इसमें इंडियन मुजाहिदीन का हाथ है. और दूसरा सुरक्षा व्यवस्था में चूक का.
दूसरे भाग पर कोई भी सहमत हो सकता है क्योंकि सुरक्षा चूक तो हुई थी.

पर आपके पहले कथन से आपकी गैरजिम्मेदारी ही झलकती है. एक जिम्मेदार सरकार नाम लने के पहले यह सुनिश्चित करेगी कि इसके पीछे क्या सचमुच वही संगठन है जिसका नाम उछाला जा रहा है.? इस संबंध में जिस तरह से पिछले शनिवार को प्रगति हुई है, यानी गोपाल गोयल, पनव कुमार, विकास कुमार और गणेश प्रसाद की पटना ब्लास्ट के सिलसिले में लखीसराय से गिरफ्तारी हुई है. वह आपकी राजनीति के लिए उलटा पड़ने वाली है.

घटना के तुरंत बाद इम्तेयाज, हैदर अली, मुजीबुल आदि के नाम सामने आये थे तब तक आप इन नामों पर राजनीति कर सकते थे. पर अगर आप अब भी पटना ब्लास्ट पर राजनीति करेंगे तो आप का दांव उलटा पड़ जायेगा. अगर आप को कोई ठोस सुबूत मिला है तो उसे सार्वजनिक करिए और दावा कीजिए की इस धमाके में इंडियन मुजाहिदीन के इम्तेयाज, मुजबील हैदर और उनके साथियों का हाथ है. तो फिर आप पवन , विकास, गणेश और गोपाल का नाम भी लीजिए. क्योंकि ये भी पटना ब्लास्ट के सिलसिले में गिरफ्तार हुए हैं.

मोदी जी जो चार लोग पटना ब्लास्सट में मारे गये उनके प्रति आपने सहानुभूति दिखायी, वह ठीक है. उनके अस्थिकलश को आप लेकर आपने जुलूस निकाला यह भी बुरा नहीं था, पर था तो राजनीति दांव ही. पर अब समय आ गया है कि जिस तरह से नयी गिरफ्तारियां हुई हैं उससे यह पता चल चुका है कि पटना ब्लास्ट को धार्मिक चश्मे से देखना आपकी विश्वसनीयता को ही आघात पहुंचायेगा.

दूसरी बात यह है कि पटना ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिदीन का हाथ हो या अभिनव भारत का, ये आतंकवादी वारदात है. इसमें इम्तेयाज का हाथ हो या गोपाल गोयल का, यह आतंकवादी वारदात है. इसलिए इस पर राजनीति करना खतरनाक है. बेहतर है कि आप इस पर राजनीति करने के बजाये इसकी संवेदनशीलता पर ध्यान दीजिए और आतंकवाद का विरोध कीजिए.

आने वाले दिनों में कुछ और गंभीर खुलासे होने वाले हैं. ऐसे में अगर आपने इसकी संवेदनशीलता को नजरअंदाज कर दिया तो आपकी गंभीरता पर सवाल उठेंगे और आपको इससे राजनीतिक लाभ के बजाये नुकसान ही हो जायेगा. क्योंकि अब पटना ब्लास्ट में बिगड़े हुए मुसलमानों और बिगड़े हुए हिंदुओं की धर्मनिरपेक्ष साजिश के गठजोड़ की बू आने लगी है. या यूं कहें कि इसमें अंतरधार्मिक षड्यंत्र के सुराग मिलने लगे हैं.

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