मोदी ने प्रणव को बताया पितातुल्‍य

पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने उनके राष्‍ट्रपति कार्यकाल के आखिरी दिन लिखे गये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पत्र को आज देश के साथ साझा किया और कहा कि प्रधानमंत्री के लिखे पत्र ने उनके मन को छू लिया।  श्री मोदी ने गत 24 जुलाई को लिखे गये पत्र में गत पांच वर्ष में राष्ट्रपति के रूप में श्री मुखर्जी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वह राष्‍ट्र के लिये उनके योगदान के प्रति सराहना और कृतज्ञता का भाव व्‍यक्त करते हैं।

 

उन्होंने कहा कि आपकी सरलता, ऊंचे सिद्धांतों और असाधारण नेतृत्‍व ने हम सबको प्रेरित किया है। श्री मोदी ने यह भी कहा कि राष्‍ट्रपति जी, आपके प्रधानमंत्री के रूप में आपके साथ काम करना मेरे लिए एक सम्‍मान की बात रही है। उन्होंने पत्र में श्री मुखर्जी के साथ अपने भावनात्मक लगाव का खुलकर इज़हार किया है। उन्होंने लिखा है कि  तीन साल पहले मैं एक बाहरी व्‍यक्ति के तौर पर नयी दिल्‍ली आया था। मेरे सामने विशाल और चुनौतीपूर्ण काम थे। इस दौर में आप हमेशा मेरे लिए एक पितातुल्‍य मार्गदर्शक रहे। आपकी बुद्धिमत्‍ता, आपके मार्गदर्शन और व्‍यक्तिगत स्‍नेह ने मुझे आत्‍मविश्‍वास और शक्ति दी।

 
उन्होंने कहा कि श्री मुखर्जी ज्ञान का एक भंडार हैं। नीति से राजनीति, आर्थिक मामले से विदेशी मामले, सुरक्षा के विषयों से राष्‍ट्रीय और वैश्विक महत्‍व के विषयों सहित विभिन्‍न मामलों पर उनकी विद्वता से वह हमेशा आश्‍चर्यचकित होते रहे। उन्होंने कहा कि आपके बौद्धिक कौशल ने निरन्‍तर मेरी सरकार और मेरी मदद की है। श्री मोदी ने कहा कि आप मेरे लिए अत्‍यन्‍त स्‍नेही और मेरा ध्‍यान रखने वाले व्‍यक्ति रहे हैं। दिनभर चलने वाली बैठकों या प्रचार अभियान यात्रा के बाद आपका ऐसा एक फोन कॉल मुझमें ताजगी और ऊर्जा भर देने के लिए पर्याप्‍त होता था, जिसमें आप कहते थे, ‘मैं आशा करता हूं कि आप अपने स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रख रहे हैं’।

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