‘यादव परिवार’ के विलय में नीतीश की ‘नाईगिरी’

पूर्व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार राजद, जदयू व सपा के विलय की प्रक्रिया को लेकर बेचैन हैं। जनता परिवार के विलय के महामंथन की आड़ में बिहार और उत्‍तर प्रदेश में नीतीश कुमार अपने लिए जमीन तलाश रहे हैं। जिन पार्टियों के विलय की पहल नीतीश कुमार कर रहे हैं, उन तीनों पार्टियों के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष यादव ही हैं। जदयू के शरद यादव, राजद के नीतीश कुमार और सपा के मुलायम सिंह यादव 1990 में वीपी सिंह के नेतृत्‍व वाले जनता दल में ही थे। वीपी सिंह सरकार के गिरने के बाद जनता दल टूटता गया और नयी पार्टियां बनती गयीं। नीतीश कुमार इन्‍हीं पार्टियों के कुछ धड़ों को एकजुट करने के अभियान में जुटे हुए हैं। जनता दल के हिस्‍सा रहे रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा भाजपा के साथ हैं। बीजू जनता दल के नवीन पटनायक, रालोद के अजीत सिंह अपनी पार्टी चला रहे हैं। चौटाला परिवार और देवगौड़ा परिवार अपनी अस्तित्‍व की लड़ाई लड़ रहा है।mavilay

वीरेंद्र यादव

 

जनता दल का यादव धड़ा यानी यादव परिवार ही राष्‍ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाए हुए है। लेकिन तीनों यादव अपनी-अपनी धारा की राजनीति अपनी शर्तों कर रहे थे। लेकिन भाजपा के अप्रत्‍याशित उभार ने तीनों को जमीन पर ला दिया। लोकसभा चुनाव में तीनों नेताओं को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने उत्‍तर प्रदेश और बिहार के राजनीतिक समीकरण और सामाजिक आधार को बदल दिया है। इस बदलाव ने नीतीश कुमार को ‘नाईगिरी’ करने का मौका उपलब्‍ध करा दिया है।

 

लालू यादव को जमीन पर ला देने और भाजपा को थउवा-थउवा करने का दावा करने वाले नीतीश कुमार अब अपने अस्तित्‍व के लिए तीनों यादव नेताओं को एक करने का प्रयास कर रहे हैं। वजह साफ है कि नीतीश कुमार बराबर बैसाखी के सहारे राजनीति करते रहे हैं। नीतीश पहले भाजपा के सहारे राजनीति कर रहे थे। जब भाजपा की बैसाखी फेंक दिए तो ‘यादव परिवार’ की बैसाखी को मजबूत करने की कोशिश में जुट गए हैं। इस प्रयास में उन्‍होंने तीनों नेताओं को मिलाने का प्रयास शुरू किया। अभी प्रयास किसी परिणाम तक नहीं पहुंचा है, लेकिन इतना तय है कि नीतीश मध्‍यस्‍थता की नयी भूमिका ‘नाईगिरी’ को पूरी तत्‍परता से निभा रहे हैं।

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