ये अहंकारी, स्वाभिमान के बलात्कारी

संजय कुमार कुन्दन एक घटना को लेकर व्यथित हैं, कहते हैं बलात्कार के मुजरिम को सजा मिल जाती है पर भ्रष्ट लोग कमजोरों के स्वाभिमान का बलात्कार करते हैं पर कुछ नहीं होता. पढ़िए उनकी व्यथा.ego

आज मेरे एक मित्र जो सौभाग्य से कवि और दुर्भाग्य से सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं, के साथ बड़ा बुरा हुआ. उन्हें अपने बड़े साहब यानी ज़िला शिक्षा पदाधिकारी से मिलना था. सो उन्होंने मुझे फोन किया .मैंने उनके ‘साहब’ को फोन किया. कहा मेरे मित्र हैं,निहायत सीधे और भले आदमी हैं , शिक्षक हैं ,आपसे मिलना चाहते हैं. कुछ समय उन्हें दे दीजिये .उन्होंने कहा, “क्यों नहीं ,जब आप कह रहे हैं तो जरूर मिल लेंगे .कहिएगा ,शाम में मिल लें”.मैंने फोन पर कवि मित्र को इत्तला दे दी.

उन शाहब के शान व शौकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनका पटना के एक पौश इलाक़े में फ्लैट नहीं बल्कि पूरा अपार्टमेन्ट है.

और फोन कट गया

शिक्षक कवि कल शाम में पहुँचे तो साहब के पीए टाइप एक शिक्षक ने कल सुबह साढ़े छ्ह बजे आने को कहा. दूसरी सुबह जब बारिश में भीगते हुए ‘साहब’ से मिलने गए तो उसी शिक्षक गुर्गे ने कहा ,अब दिन में ऑफिस में आइये.बेचारे भले आदमी परेशान .उन्होंने ‘साहब’ के उस गुर्गे से मेरा नाम लेकर कहा ,उनको फोन करता हूँ .मैं नींद में था .मुझे कवि मित्र का इतना भर फोन आया ,’देखिये ,ये मुझे साहब से मिलने नहीं दे रहे हैं’ और फोन कट गया.

शाम में निहायत आहत स्वर में कवि-शिक्षक मित्र का दोबारा फोन आया तो शेष वाकये का पता चला .उन्होंने फोन इसलिए काट दिया था क्योंकि साहब अचानक अवतरित हो गए थे .उन्होंने समझा उनसे मुलाकात हो जायेगी. लेकिन साहब ने निहायत अपमानजनक लहजे में कहा ,’भागो यहाँ से ,मास्टर हो ,बूढ़े हो चले हो ,जब चाहा मिलने चले आये ,भागो तुरंत भागो’.

इतना सुनते ही वे स्तब्ध रह गए. आजतक किसी ने उनका इतना अपमान नहीं किया था .वे कुछ नहीं कह पाए. वे अपमान से जलते हुए और बारिश में भीगते हुए वापस लौट आए.

मैं शर्मिन्दा हूँ कि उस ग़रीब शिक्षक की इतने बड़े ‘साहब’ से मुलाकात का समय मैंने क्यों तय करवा दिया. पद में उनसे कम नहीं रहने के बावजूद मैं एक ग़रीब आदमी हूँ. उनके रसूख़ भी उनकी इमारत की तरह बड़े बुलंद हैं .वे आसानी से किसी को अपमानित कर देने की हैसियत में हैं .बेचारे शिक्षक डरे भी हुए हैं कि कहीं ‘साहब’उनका अनिष्ट न कर दें.

लेकिन मेरे मन में बड़ी तकलीफ़ है.बलात्कार की घटनाओं की बड़ी पब्लिसिटी होती है, मुजरिम को सज़ा भी होती है, समाज उद्वेलित भी होता है लेकिन भ्रष्ट परन्तु ताक़तवर लोगों के द्वारा जो कमज़ोरों के आत्म-सम्मान का बलात्कार किया जाता है, कहाँ दर्ज़ होता है?

संजय कुंदन बिहार सरकार के शिक्षा विभाग में आला अधिकारी हैं. मन, लेखनी और सोच से कवि हैं. उनकी यह टिप्पणी फेसबुक से ली गयी है

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