ये उड़न तश्तरी क्या है, इससे चीन सीमा पर सेना की नींद क्यों उड़ी है?

सीमा पर तैनात भारतीय सेना ने मुख्यालय को भेजे इमरजेंसी संदेश में कहा है कि चीन की सीमा के आकाश में अज्ञात उड़न तश्तरियों से सुरक्षा तंत्र की चिंतायें बढ़ गई हैं. 14 वीं कोर ने इन उड़न तश्तरियों की जांच में खुफिया तकनीकी एजेंसियों की क्षमता पर भी सवाल उठाये हैं. आखिर ये उड़न तश्तरी है क्या ? और इससे भारतीय सेना की नींद क्यों उड़ गई है-

कुछ इस तरह की हो सकती हैं उड़न तश्तरियां

सेना की खबरों में कहा गया है कि भारत और चीन की सीमा पर बीते कुछ समय से आसमान में अज्ञात उड़नतश्तरियों (यूएफओ) की उड़ान ने सुरक्षा तंत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं.चीन के साथ लगी उत्तरी सीमा पर तैनात सेना की 14वीं कोर ने सरकार को इस संबंध में रिपोर्ट भेजी है. साथ ही इनकी पहचान में तकनीकी खुफिया एजेंसियों की क्षमताओं पर सवालिया निशान लगाए गए हैं.

आकाश में उड़ती किसी अज्ञात उड़ती वस्तु या यूएफओ (अनआईडेंटीफायेड ऑब्जेक्ट) को कहा जाता है.इन अज्ञात उड़ती वस्तुओं का आकार किसी डिस्क या तश्तरी के समान होता है या ऐसा दिखाई देता है, जिस कारण इन्हें उड़न तश्तरीयों का नाम मिला.

कई चश्मदीद गवाहों के अनुसार इन अज्ञात उड़ती वस्तुओं के बाहरी आवरण पर तेज़ प्रकाश होता है और ये या तो अकेले घुमते हैं या एक प्रकार से लयबद्ध होकर. इनमें बहुत गतिशीलता होती है. ये उड़न तश्तरीयाँ बहुत छोटे से लेकर बहुत विशाल आकार तक हो सकतीं हैं.

चीन की सीमा पर पता चलने वाली उड़न तश्तरियों के बारे में सेना मुख्यालय सूत्रों ने बताया कि 14वीं कोर की रिपोर्ट में कहा गया है कि लद्दाख क्षेत्र में सीमावर्ती इलाके में दिन और रात के वक्त अज्ञात उड़नतश्तरियों की गतिविधियां देखी गई हैं. इस तरह की तश्तरियों से सेना की चिंता बढ़ना लाजिमी हो जाती है.हालांकि अभी तक इन से कोई नुकसान तो नहीं हुआ है पर इससे सेना सतर्क रहना चाहती है और वह यह भी चाहती है कि ऐसी गतिविधियों की सुरक्षा की दृष्टि से उसे बारीक जानकारी होनी चाहिए.

14 वीं कोर के अनुसार रडार व अन्य निगरानी उपकरण इनकी पहचान का कोई भी निशान पकड़ने में नाकाम रहे. यहां तक कि किसी धातु के भी निशान रडार पर नहीं मिल सके हैं.इस मामले में राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की विशेषज्ञ टीमों से मदद मांगी गई, लेकिन वे भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे. इससे सुरक्षा तंत्र की चिंता बढ़ गई है.सूत्र बताते हैं कि बीते तीन महीनों के दौरान इस तरह की सौ से ज्यादा घटनाएं सीमा पर तैनात सेना और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की टुकडि़यों ने रिपोर्ट की हैं.

24 जून 1947 को पहली बार निजी पायलट केनेथ अर्नाल्ड द्वारा अमेरिका में दिखे नज़ारे की रिपोर्ट के बाद ही डीएफओ या उड़न तश्तरी या फिर उड़न डिस्क जैसे शब्द प्रचलित हुए. कभी कभी इसे विदेशी अंतरिक्ष यान के पर्याय के रूप में भी इस शब्द का प्रयोग किया जाता है.

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