योगेंद्र यादव जैसे कितने आये गये, देश वहीं का वहीं है

संपूर्ण क्रांति और परिवर्तन के नारे के साथ राजनीति में कदम रखने वाले लालू यादव को परिवर्तन का भ्रम समझ में आने लगा है। क्रांति के नारों के खोखलापन से भी उब गए हैं।

 

 पटना में पत्रकारों से चर्चा में उन्‍होंने अपनी निराशा और हताशा को उजागर किया। आप में बगावत व परिवर्तन की मार झेल रहे योगेंद्र यादव के संबंध में उन्‍होंने कहा कि योगेंद्र यादव जैसे कितने आये और गये, सत्‍ता परिवर्तन करने के लिए, लेकिन देश जहां का तहां खड़ा है। हमलोगों के यहां ज्यादा थिंक टैंक वाले लोगों की जरूरत नहीं है। जनता परिवार के विलय पर उन्‍होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में हम नये दल के साथ चुनावी मैदान में जायेंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रयास किये जा रहे हैं। राजद, जदयू समेत छह दलों के विलय की प्रक्रिया चल रही है। इसमें जो तकनीकी कार्रवाई की जानी है, वह की जा रही है। सभी दलों के लोग एकमत हैं कि विलय करना है।

 

 उन्होंने कहा कि बिहार में राजद और जदयू मिल कर एक दल बनेगा और एक सिंबल पर ही विधानसभा का चुनाव लड़ा जायेगा। जनता परिवार की एकता के लिए मीटिंग बुलायी है। इमरजेंसी में बैठक बुलायी गयी है। मुलायम सिंह यादव की अध्यक्षता में कई बैठकें हुईं। अभी कई पार्टियों से बातचीत बाकी है। सप्ताह भर में नहीं संभव है। पांच अप्रैल को राजद की कार्यकारिणी की बैठक पर उन्होंने सहमति जतायी। बैठक में विलय समेत अन्य रणनीतियों पर पार्टी नेताओं व पदाधिकारियों के साथ चर्चा की जा सकती है।

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