रण तो रंजीत ने जीता

इतिहास के पन्ने मंत्रियों के इस्तीफे से भरे हैं पर ऐसा विरले ही होता है कि एक नौकराशाह की बदौलत एक ही दिन दो-दो केंद्रीय मंत्रियों को चित्त होना पड़ा है. जानए आखिर कौन हैं नौकरशाह.

रंजीत सिन्हा

रंजीत सिन्हा

रेलमंत्री पवन बंसल और कानून मंत्री अश्विनी कुमार काफी जगहंसाई के बाद अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं. बंसल के भांजे पर 90 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप हैं तो कानून मंत्री अश्विनी कुमार पर कोलगेट भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की रिपोर्ट बदलवाने का आरोप है. इन दोनों ममामलों में मंत्रियों के इस्तीफे के पीछे सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा की दिलेरी ही है.

रंजीत सिन्हा की नेतृत्व वाली सीबीआई ने अश्विनी कुमार के मामले में बाजाब्ता हलफनामा देकर सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि सीबीआई की रिपोर्ट तैयार करने में अश्विनी कुमार ने हस्तक्षेप किया था. इस पर न्यायालाय आग बबूला हो गया और सरकार के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए उसकी मिट्टी पलीद कर दी.

दूसरी तरफ सीबीआई ने रेलमंत्री पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला द्वारा रेलवे बोर्ड के सद्सय महेश कुमार से 90 लाख रुपये बतौर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया.
एक तरह से रंजीत सिन्हा ने सीबीआई की साख को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

1952 में जन्रंमे रंजीत सिन्हा बिहार कैडर के 1974 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. किसी दौर में उन्हें लालू प्रसाद का काफी करीबी माना जाता था. बीजेपी ने रंजीत सिन्हा की नियुक्ति का विरोध लालू के साथ उनकी नजदीकी को लेकर ही किया था. लालू जब रेलमंत्री बने थे तो रंजीत को आरपीएफ का महानिदेशक बना दिया गया था. जिन्हें बाद में ममता बनर्जी के कार्यकाल में हटा दिया गया था. रंजीत सिन्हा इससे पहले भी सीबीआई में काम कर चुके हैं.उन्होंने सीबीआई निदेशक का पद दिसम्बर 2012 में पद संभाला था. सीबीआई निदेशक का कार्यकाल दो सालों का होता है.

रंजीत सिन्हा इस से पहले भी सीबीआई में काम कर चुके हैं. वह पटना में सीबीआई के डीआईजी रह चुके हैं.

वह बिहार के पूर्व आईपीएस अधिकारी जी नारायण के दामाद हैं.

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