रमेश पर रस्साकशी

दिल्ली के मुख्यसचिव बनाये जाने के विवाद में मुख्यमंत्री केजरीवाल ने गृहमंत्रालय को निरुत्तर कर दिया है. वह रमेश नेगी को मुख्यसचिव बनाने पर अड़े हैं जबकि राजनाथ सिंह इसके पक्ष में नहीं हैं. आखिर क्यों?kejriwal

नौकरशाही डेस्क

केजरीवाल इस बात पर अड़े हैं कि रमेश नेगी को ही दिल्ली का मुख्यसचिव बनाया जाये जबकि गृहमंत्रालय इसके खिलाफ है. गृहमंत्री का तर्क है कि जिन रमेश नेगी को दिल्ली का मुख्य सचिव बनाने की मांग केजरीवाल कर रहे हैं वह वरीयता क्रम में 14 वें नम्बर पर हैं इसलिए उन्हें मुख्यसचिव नहीं बनाया जा सकता. लेकिन केजरीवाल ने गृहमंत्री राजनाथ  सिंह के इस तर्क की हवा यह कहते हुए उड़ा दी है कि अगर नेगी को अरुणाचल प्रदेश का मुख्य सचिव बनाया जा सकता है तो उन्हें दिल्ली का मुख्यसचिव क्यों नहीं बनाया जा सकता?

उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने नेगी की वरिष्ठता और वेतनमान को उनकी नियुक्ति की राह का रोडम बताया है।. जबकि एक जायज सवाल यह उठता है कि वरिष्ठता क्र म में 14 वें पायदान पर होने और कम वेतनमान के बाद भी अगर उनकी तैनाती अरुणाचल प्रदेश में हो सकती है तो उसी पद पर दिल्ली में क्यों नहीं हो सकती. केजरीवाल ने पूछा कि एक ही अधिकारी के लिए समान पद पर तैनाती को लेकर अलग नियम कैसे हो सकते हैं.

वरिष्ठता का कुतर्क

गृहमंत्री का यह तर्क इसलिए भी कमजोर है क्योंकि जब वह खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ते तो उन्होंने कई अफसरों की वरिष्ठता को नजर अंदाज करके जूनियर अफसरों को आगे बढ़ाया ता. ऐसे उदाहरण बिहार में हाल पिछले वर्ष देखने को भी मिला जब अशोक कुमार सिन्हा मुख्य सचिव के पद से रिटायर हुए तो उनकी जगह अंजनी कुमार सिंह को लाया गया. जबकि अंजनी कुमार सिंह से चार वरिष्ठ आईएएस अफसरों को नजर अंदाज कर दिया गाया. ऐसे मामले पिछले वर्ष गुजरात में भी देखने को मिले जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री रहते हुए अपने खास नौकरशाह को मनपसंद पदों पर बिठाते रहे जबकि वरिष्ठ आईएएस अफसरों को नजरअंदाज किया गया.

दर असल माना जाता है कि रमेश नेगी और भाजपा के रिश्ते कभी अच्छे नहीं रहे. इसलिए गृहमंत्रालय नहीं चाहता कि नेगी को दिल्ली बुलाया जाये. गृहमंत्रालय किसी और नौकरशाह को दिल्ली में रखना चाहता है जो उसके इशारों पर काम कर सके.

इस मामले में लगता है कि विवाद अभी और गहरा होगा क्योंकि केजरीवाल ने केंद्र सरकार   से पूछा है कि क्या ऐतिहासिक जनादेश के साथ चुनी गई दिल्ली सरकार को शासन चलाने के लिए अधिकारी मांगने का हक नहीं है। केजरीवाले ने इस मसले पर केन्द्र सरकार के रवैये पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार को हर कदम पर सहयोग का वादा करने के बाद गृह मंत्रालय के इस रवैये से मुझे बेहद निराशा हुई।

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