रशीद मसूद! कौन रशीद मसूद?

जिस दिन आधी रात को देश अंग्रेजों की गुलमी निजात पा रहा था, ठीक सूरज के पहली किरण के साथ रशीद मसूद की पैदाईश हुई थी.rashid.masood

इर्शादुल हक,सम्पादक नौकरशाही डॉट इन

आज यानी गांधी जी की जयंती के ठीक एक दिन पहले दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य रशीद मसूद को मेडिकल एडमिशन घोटाले में चार साल की सजा सुनाई है. मसूद ने अयोग्य छात्रों का एडमिशन करवाया था.

रशीद मसूद उस राजनेता का नाम है जिसे कभी समाजवादियों ने तो कभी सेक्युलरवादियों ने मुस्लिम चेहरे के रूप में इस्तेमाल किया.वह अजित सिंह के पिता चौधरी चरण सिंह से लेकर मुलायम सिंह तक और वीपी सिंह से लेकर देवी लाल तक के साथ रहे और काम किया.जीवन भर समाजवादी रंग में ही रहे. तब गैर कांग्रेसी इनकी ईमानदारी की कसमें खाया करते थे. भरोसा इतना कि 2007 में उपराष्ट्रपति का चुनाव तक लड़वा दिया. इनके सर की टोपी भी समाजवादी ही रही. यह समाजवादी टोपी भी अजीब पहचान रखती है जो मुसलमानों की महफिलों में मुसलमान और गैरमुस्लिमों की महफिलों में गांधीवादी तक होने का भ्रम फैलाती है. यानी समाजवादी, सेक्युलरवादी और गांधीवादी.

पर भला हो सीबीआई अदालत का जिसकी वजह से रशीद मसूद का एक नया चेहरा सामने आ गया.

मसूद पर केंद्र की वीपी सिंह सरकार के समय केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए मेडिकल साइंसेज कोर्स में प्रवेश में हुई गडबडियों का आरोप था.

2011 में रशीद मसूद को कांग्रेस ने बड़ी ललचाई नजरों से और उम्मीदों से पार्टी में शामिल किया था. रशीद तब समाजवादी पार्टी से राज्यसभा मेम्बर थे. कांग्रेस ने इस मुस्लिम लीडर को, मुसलमानों के वोट को रिझाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस कार्यकारिणी का सदस्य बनाया बल्कि राज्यसभा की सदस्यता भी दलिवाई. हालांकि जिस उम्मीद से रशीद को पार्टी में शामिल किया गया, उसका कोई फायदा नहीं हुआ. यूपी के सहारनपुर से राजनीति करने वाले मसूद की कोशिशों के बावजूद कांग्रेस यूपी विधानसभा चुनाव में परास्त हो गयी.

मसूद जनता पार्टी के दौर में सुर्खियों में रहते थे. वह लोकदल के 1975-77 तक महासचिव थे. वह पहली बार 1977 में सहारनपुर से लोकसभा के लिए चुने गये. दूसरी बार वह लोकदल के टिकट पर लोकसभा में चुनाव जीते थे. मसूद 1986-89 के बीच भी राज्यसभा के सदस्य रहे.

अपने राजनीतिक करियर की छोटी सी अवधि के लिए मसूद स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री रहे. यह अप्रैल 1990 से नवम्बर तक मंत्री रहे, वीपी सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में. इसी समय में उन्होंने अपने पद को दुरोपयोग किया जिसकी सजा उन्हें 23 वर्षों के बाद मिली है.

वह 2007 में उप राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ चुके हैं.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले मसूद ने एलएलबी की उपाधि ले रखी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*