राजद का 20वां स्थापना दिवस:लालू के नाम, दरकिनार किये जा चुके एक समर्पित कार्यकर्ता का पत्र

एक तरफ राजद अपनी स्थापना का बीसवां वर्ष मना रहा है वहीं  निष्क्रिय हो चुके कार्यकर्ता  जीतेंद्र सिंह ने लालू प्रसाद के नाम पत्र लिख कर पार्टी के स्वर्णिम दिनों के साथ कठिन दौर की चुनौतियों को याद दिलाते हुए संगठन की मजबूती के लिए वैसे समर्पित कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ने की जरूरत  बताया है जिन्हें कुछ गलतफहमियों के कारण दर किनार कर दिया गया है.

फोटो.Credit Kuni Takahashi ( फाइल चित्र)

फोटो.Credit Kuni Takahashi ( फाइल चित्र)

 

आदरणीय लालू प्रसाद जी !

राजद पार्टी अपनी स्थापना का 20वां साल का जश्न 5 जुलाई को मनाया जा रहा है,इसकी धूम और चमक पटना के चौक चौराहों और सोशल मीडिया में देखने को मिल री है. आज से उन्नीस साल पहले जब पार्टी वजूद में आयी तब भी वह सत्ता में थी और आज उन्नीस साल बाद फिर सत्ता में है.

 

बीच के कुछ वर्ष पार्टी न सिर्फ सत्ता खो चुकी थी बल्कि लोकसभा और विधान सभा में भी इसकी संख्या काफी घट गयी थी. लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बिहार की सत्ता में पुनर्वापसी की. फिर पार्टी की नयी पीढ़ी के दो प्रतिनिधि चेहरे- तेजस्वी प्रसाद यादव व तेज प्रताप यादव मंत्री बने.

कठिन दौर का साथी

किसी पार्टी की तरह राष्ट्रीय जनता दल ने भी इन सालों में कई कठिन चुनौतियों को झेला. कई मायने में पतनशील भी हुई लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि पिछले लग भग दो दशकों में पार्टी ने अपने बुनियादी जनाधार को कभी नहीं खोया. और इस बुनियादी जनाधार को मजबूत देने में एक आम कार्यकर्ता से ले कर पार्टी के अभिभावक ( लालू प्रसाद जी) का हाथ है.  एक कार्यकर्ता के तौर पर हमारे जैसे दर्जनों लोग संगठन की बुनियाद की एक-एक ईंट को मजबूत करने सक्रिय रहे. इसके लिए हमें खुशी भी है और संतोष भी. क्योंकि  हम सब भी राजद की स्थापना के गवाह थे,लेकिन अफसोस इस बात का कि आज अनेक पुराने साथी पीछे छुट गए या छोड़ दिए गए या  उन्हें मजबूर कर दिया गया जिसके कारण उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी.

सामाजिक न्याय का प्रशिक्षण

आदरणीय लालू जी हमारे दिलों में सामाजिक न्याय का जो अलख जला है उसमें आपके राजनीतिक प्रशिक्षण की अहम भूमिका है. भले ही समय बदला हो और हालात भी बदले हों पर सामाजिक न्याय के उसूल हमारे दिलों में सदा मजबूत से कायम रहे हैं. लेकिन समय ने कुछ ऐसी परिस्थतियां दिखाई कि बहुत सारी चीजें बदल गयीं. आज जो हालात हैं वह यह हैं कि आज  आपने अपने चारो तरफ ऐसी लकीर खिंच रखी है जो पार्टी के मजबूती में बाधक है. पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को फिर से जोड़ कर विधान सभा के साथ साथ अब लोकसभा में भी मजबूत हुआ जा सकता है. इसलिए यह उचित समय है कि पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं को आप खुले दिल से आमंत्रित करें घर वापसी के लिए. लालू जी आप वे  दिन भी याद करें जब सरकार अल्पमत में घिरी थी और आपको अपनी सरकार बचानी थी, आपके लिए अंगद के पैर जैसा मजबूत कदम की जरूरत थी और सरकार के बहुमत को बरकरार रखनी थी, जग जाहिर है क्या हुआ और किसने क्या. माला में हर एक मोती की अपनी कीमत होती है और सब मोती का अलग महत्व होता है । पहचाने , अपने और पराये को, राजद को सच्चे सिपाही की जरूरत है।

निवेदन

आज मैं राजद प्रमुख और अभिभावक तुल्य लालू जी और भविष्य के कर्णधार तेजस्वी व तेज प्रताप यादव कीजोड़ी से विनम्र निवेदन करता हूँ, आप सब राजद की स्थापना दिवस के अवसर पर सभी पुराने साथियों को पुनः घर वापसी का आह्वान करें. आने वाले दिनों में रजाद को और मजबूत करने के लिए पुराने साथियों को इकट्ठा करना बहुत जरूरी है.

About The Author

लेखक एक्सएलआरआई ग्रेजुएट जीतेंद्र सिंह एक सधे व्यवसायी हैं जो अनेक उद्यम स्थापित कर चुके हैं और युवाओं के लिए रोजगार सृजन के अनेक प्रोजेक्ट का संचाल करते हैं. वह समाजसेवा के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं. उनसे Jsinghxlri@gmail.com पर सम्पर्क किया जा सकता है

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