राजनीतिक बवंडर का रूप लेती जा रही है मांझी-साधु मुलाकात

  रात के अंधियारे में अपने वरिष्ठ नेताओं- नीतीश, शरद लालू से मिलने की बाद अगली कुहासा भरी सुबह में मुख्यमंत्री मांझी साधु यादव के घर क्या गये कि इसने राजनीतिक बवंडर को जन्म दे दिया है.

साधु के घर से बाहर आते मांझी

साधु के घर से बाहर आते मांझी

नौकरशाही डेस्क

मांझी-साधु मुलाकात के बाद यूं तो हर बड़ा नेता अचरज में है लेकिन जद यू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने चुप्पी तोड़ते हुए सवाल खड़ा कर दिया है कि क्रिमनल बैकग्राउंड के साधु यादव के यहां जाना सुशासन के एजेंडे के खिलाफ है. नीरज ने अपने बयान में कहा है कि हमारे नेता नीतीश कुमार का पहला एजेंडा सुशासन कायम करना है ऐसे में मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को सुशासन के एजेंडे पर केंद्रीत हो कर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को राजनीति और संगठन की जिम्मेदारी पार्टी पर छोड़नी चाहिए.

बोले जद यू  प्रवक्ता

नीरज कुमार ने नौकरशाही डॉट इन को साफ कहा है कि “उनका यह बयान पार्टी का आफिसियल बयान है”. मतलब साफ है कि जद यू, जीतन राम मांझी के इस कदम से नाखुश है.

गौर करने की बात है कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी शुक्रवार की सुबह अचानक साधु यादव के मित्रमंडल कॉलोनी के आवास पर पहुंचे और वहां दही-चूड़ा ग्रहण किया. वहां साधु से क्या बात हुई ये खबर मीडिया से छुपायी गयी और यह बताया गया कि यह शिष्टाचार मुलाकत है. इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के इस गुप्त सफर की भनक कई अफसरों को नहीं हुई.

लालू ने कहा उकसाइए नहीं

मांझी के इस रवैये से पार्टी के अंदर भारी कुलबुलाहट है. पार्टी के कुछ सूत्र बता रहे हैं कि अभी नीतीश जी बीमार हैं लेकिन वह भी हालात पर गहरी नजर रख रहे हैं.

दूसरी तरफ, बताया जा रहा है कि लालू प्रसाद ने मांझी के इस कदम पर उन से बात की है और सलाह दी है कि कोई ऐसे कदम न उठायें जिससे नीतीश कुमार को लगे कि उन्हें उकसाया जा रहा है.

पार्टी के कुछ सूत्र बता रहे हैं कि लगता है कि मांझी की पीठ पर किसी का हाथ है जिससे वह बहक रहे हैं.

जीतन राम मांझी ने पिछले कुछ महीनों में अपनी एक स्वतंत्र और बेबाक छवि बनायी है लेकिन एक ऐसे नेता से अचानक मिलना जिनकी छवि कटघरे में रही हो, इसने मांझी की अपनी पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को संदेह के दायरे में ला दिया है.

याद करने की जरूरत है कि सादु यादव लालू प्रसाद के साले हैं. सांसद रह चुके हैं. एक विवादित चेहरा रहे हैं. उन्हें कुछ साल पहले लालू प्रसाद ने राजद से निकाल दिया, यह मानते हुए कि उनकी वजह से पार्टी की छवि खराब हो रही थी.

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