बदल ही गया प्रोमोश पर आईएएस, आईपीएस बनने का नियम

कार्मिक मंत्रालय के एक फैसले से राज्य लोकसावा के अधिकारियों को भारी मायूसी हुई है, अब उन्हें आईएएस,आईपीएस में प्रोमोशन के लिए चार चरण की परीक्षा देनी पड़ेगी. वहीं इस फैसले का राज्य लोकसेवा के अधिकारियों ने जोरदार विरोध किया है.IPS_Officer

अभी तक के नियमों के अनुसार राज्य लोकसावा के अधिकारियों की गोपनीयता रिपोर्ट और वरिष्ठता के आधार पर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस आदि कैटेग्री में प्रोमोशन मिल जाया करता था. पर नये प्रावधानों के तहत इन शर्तों को कार्मिक मंत्रालय ने हटा दिया है. इस कारण राज्य लोकसावा के अधिकारियों को भारी मायूसी हुई है. हालांकि राज्य सरकारों ने नये प्रावधानों का काफी विरोध किया था लेकिन इसके बावजूद कार्मिक मंत्रालय ने राज्य सरकारों की एक न सुनी और नये नियम लागू कर दिया है.

नए प्रावधानों के तहत राज्य लोकसेवा आयोग द्वारा चयनित अधिकारियों को तीनों अखिल भारतीय सेवाओं में स्थान पाने के लिए चार स्तरीय परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा. कार्मिक मंत्रालय का मानना है कि अभी तक उच्चाधिकारियों की कृपा और सिफारिशों की भूमिका काफी अहम होती थी. इस लिए कई होनहार अधिकारी प्रोमोशन के लाभ से वंचित रह जाते थे. लेकिन बदले नियमों के मुताबिक ग्रुप ‘ए’ में आठ वर्षो की सेवा देने वाले वैसे अधिकारी जिनकी आयु 54 वर्ष से कम हो, अखिल भारतीय सेवाओं में स्थान पाने के लिए आयोजित परीक्षा में बैठने के योग्य होंगे.

नये बदलावों के तहत परीक्षा के लिए प्रयासों पर तो कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है, लेकिन अधिकतम उम्र सीमा को कम करने का अधिकार संबंधित अधिकारियों के पास होगा.

हालांकि कार्मिक मंत्रालय ने यह विक्लप खुला रखा है कि नई व्यवस्था लागू होने के तीन वर्ष बाद इस नियम की समीक्षा की जा सकेगी.

परीक्षा की रूपरेखा

चार चरणों में आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए एक हजार अंक निर्धारित किये गए हैं. लिखित परीक्षा का 30 फीसद, सेवाकाल व एसीआर का 25-25 फीसद और साक्षात्कार के लिए 20 फीसद मानक तय किया गया है.

राज्य लोकसेवा के अधिकारियों को प्रोन्नति हासिल करने के लिए लिखित परीक्षा के तहत दो पेपर देने होंगे. पहले प्रश्नपत्र में जहां मानसिक योग्यता की जांच की जायेगी, वहीं दूसरे पेपर में सामान्य अध्ययन और राज्य आधारित (जिस राज्य से अधिकारी होंगे) प्रश्न होंगे.

दूसरे चरण में सेवा काल का आकलन किया जाएगा इसमें यह देखा जायेगा कि आपका सेवा काल कितने वर्षों का है और कैसा है, जबकि तीसरे चरण में अफसरों के एसीआर का विश्लेषण होगा. हालांकि सीआर के विश्लेषण की जवाबदेही वरिष्ठ अधिकारियों की ही होगा. इसी प्रकार अंतिम और चौथे चरण में चरण में उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जायेगा.

हालांकि इस तरह की परीक्षा का विरोध करते हुए एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है कि 10-12 सालों से पढ़ने लिखने की आदत छोड़ चुके अधिकारियों की लिखित परीक्षा लेना कतई उचित नहीं है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि बदली स्थिति में राज्य सेवा के अधिकारी काम पर कम ध्यान देंगे और सेवाकाल में पढ़ाई लिखाई पर ध्यान लगायेंगे जिससे प्रशासनिक कामों में काफी प्रभाव पड़ेगा. इसलिए हम ऐसे बदलाव के खिलाफ हैं.

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