लालू के उत्‍तराधिकार की ‘हड़बड़ी’  

राजद अध्‍यक्ष लालू यादव ने घोषणा कर दी है कि पार्टी उनके कुनबे से बाहर नहीं निकलेगी। संगठन पर उनकी संतानों का कब्‍जा बरकरार रहेगा। इसके साथ ही राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह भी दिखा कि पार्टी पर कब्‍जा करने के लिए उनका कुनबा काफी हड़बड़ी में है।rjd baithak

नौकरशाही ब्‍यूरो

 

मौर्या होटल में आयोजित कार्यकारिणी की बैठक में सभी नेता मंच पर विराजमान थे। लालू यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप मंच के पीछे बैठ कार्यवायी देख रहे थे। बैठक में शामिल लोगों की अपेक्षा थी कि लालू यादव के साथ राबड़ी देवी और उनकी तीन संतानें जरूर आएंगे। लेकिन बैठक में राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्‍वी यादव नहीं आए। तेज प्रताप आए भी तो मंच से नीचे बैठे थे। कार्यकारिणी की बैठक में सांसद पप्‍पू यादव ने उत्‍तराधिकार का सवाल खड़ा कर दिया।

 

इसका जवाब देते हुए लालू यादव ने घोषणा की कि बाप का उततराधिकारी बेटा होता है। लालू यादव की इस घोषणा से तेजप्रताप ज्‍यादा ही उत्‍साहित हो गए। वह मंच के पीछे से उठे और बिना बुलाए मंच पर चढ़ गए। इस दौरान अचानक सक्रियता का अर्थ लोग नहीं समझ पाए। लोगों ने समझा कि वह लालू यादव से किसी चर्चा के लिए गए होंगे। लेकिन उन्‍होंने लालू यादव के पीछे पप्‍पू यादव के बगल में खाली कुर्सी पर बैठ गए। उक्‍त कुर्सी पर पार्टी के कोई वरिष्‍ठ नेता बैठे थे और उस समय बाहर निकले हुए थे। जब वह लौटकर आए तो कुर्सी का अतिक्रमण देख मंच के नीचे ही कुर्सी की जुगाड़ में जुट गए। इस बीच एक नेता ने कटाक्ष किया कि यह हड़बड़ी कुछ ज्‍यादा ही दिख रही है। विलय के बाद जब राजद ही नहीं बचेगा तो उत्‍तराधिकार का सवाल कहां से आ गया।

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