ले.ज. बख्शी अपने जूनियर बिपिन रावत के अधीन काम करने को तैयार, नहीं दिया इस्तीफा, माजरा क्या है?

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत द्वार  27 वें सेना प्रमुख का प्रभार संभालने के बाद उनके सीनियर  लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी ने उन्हें पूरा सहोयग देने की घोषणा की है. सेना के इतिहास में यह पहला अवसर है जब सीनियर अफसर को दरकिनार कर जूनियर को सेना प्रमुख बनाये जाने पर ले.ज. बख्शी ने इस्तीफा नहीं दिया है.RAWAT
      ज. बख्शी और ले.ज.  पी मोहम्मद हारिज को दर किनार करके ले. ज. बिपिन रावत को सेना प्रमुख बनाया गया है. इससे पहले इंदिरागांधी के जमाने में वरिष्ठ अधिकारी को सेना प्रमुख नहीं बना कर जूनियर को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी थी तो उन्होंने सेना से इस्तीफा दे दिया था.
     
 
 
  हालांकि अटकलें लगायी जा रही थीं कि ले.ज बख्शी अपने इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं. लेकिन उन्होंने इस्तीफा या अवकाश के बजाये एक बयान जारी कर कहा है कि       ‘सेना प्रमुख का पद भार संभालने पर जनरल बिपिन रावत को मैं अपनी शुभकामनाएं और पूर्वी कमान का पूरा सहयोग देता हूं।’ इससे पहले ये अटकलें थी कि लेफ्टिनेंट जनरल बख्शी इस्तीफे की पेशकश कर सकते हैं या समय से पहले सेवानिवृत्ति ले सकते हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर से भी हाल में मुलाकात की थी .           
   
   उधर  माना जा रहा था कि इस घटनाक्रम के बाद बख्शी इस्तीफा दे सकते हैं.  लेकिन मीडिया जगत में चर्चा है कि बख्शी को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का नया पद दिया जा सकता है. जल्द ही इस सिलसिले में सरकार फैसला भी कर सकती है.
          बख्शी और मोहम्मद हारिज को दर किनार किये जाने के बाद  सोशल मीडिया पर काफी बहस भी चली थी जिसके बाद बख्शी ने  अनुरोध किया था कि मीडिया और सोशल मीडिया में अटकलबाजी और ‘ट्रालिंग’ (अभद्र टिप्पणी) बंद होनी चाहिए। साथ ही हर किसी को सेना एवं राष्ट्र की बेहतरी के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना चाहिए।
 

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