वरुण के जहरीले भाषण मामले में यूपी सरकार का रवैया संदिग्ध

वरुण गांधी को घृणा फैलाने वाले भाषण से सीजीएम अदालत से बरी किये जाने के खिलाफ यूपी सरकार ने जिला न्यायालय में अपील तो कर दी है पर उसका रवैया संदिग्ध है.varun-gandhi

क्योंकि एक अन्य मामले में तमाम आलोचना के बावजूद यूपी सरकार ने समय सीमा के अंदर वहरुण के जहरीले भाषण के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर नहीं की थी.

भाजपा सासंद और महा सचिव वरुणगांधी ने एक खास समुदाय के खिलाफ जहरीला भाषण दिया था जिसके बाद उनके खिलाफ याचिका दायर की गयी थी. यह भाषण उन्होंने 27 फरवरी और 5 मार्च को दिया था. लेकिन जब मामला अदालत में चला तो एक एक कर सारे गवाह होस्टाइल हो गये थे. तहलका ने अपनी खोजी रिपोर्ट में यह उद्भेदन किया था जिसमें यह साबित किया था कि इन गवाहों को लालच दे कर उन्हें होस्टाइल हो जाने के लिए प्रेरित किया था.

तहलका रिपोर्ट के मुताबिक इसमें अखिलेश यादव सरकार के बड़े लोगों का भी हाथ था.

इसके बाद अखिलेश यादव सरकार की बड़ी आलोचना हुई थी. जिसके कारण अखिलाश सरकार के लिए यह शर्मनाक हो गया था क्योंकि वह एक तरफ सेक्युलर होने का दंभ भरती है वहीं दूसरी तरफ उसने भाजपा सांसद वरुण गांधी द्वारा एक समुदाय के खिलाफ जहरीला भाषण देने के बावजूद उन्हें बचाने में लगी थी.

ऐसे में इस बात का संदेह है कि वह समाजिक समुहों के दबाव में आकर जिला न्यायालय में अपील तो दायर करने पर विविश तो हुई है पर वह अदालत में मामले को उचित ढंग से रख पायेगी. क्योंकि एक अन्य मामले में राज्य सरकार ने जिला सत्र न्यायालय में अपील की तारीक बीत जाने के बावजूद अपील नही कर पायी थी. इसलिए अब तक को अखिलेश सरकार का जो व्यवहार है उससे नहीं लगता कि वह इसबारभी कोई ईमानदारी दिखा पायेगी.

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