सुनील पांडे: आइए सुनायें उनकी अपराध यात्रा

आपराधिक छवि के जद यू विधायक सुनील पांडेय कल गिरफ्तार कर लिए गये. हत्या, लूट, डकैती, अपहण के दर्जन भर मामलों के आरोपी इस नेता के जीवन की अनसुनी कहानी की पहली किस्त विनायक विजेता की जुबानी

सुनील पांडेय अपराध की दुनिया में प्रवेश, बगल में गुरू सिल्लू मियां

सुनील पांडेय अपराध की दुनिया में प्रवेश, बगल में गुरू सिल्लू मियां

माफिया कहलाने की लोगों की चाहत ने शाहाबाद की उपजाऊ जमीन को कई बार खून से सीचा है.. यहाँ के घरों में खेला जाता रहा है खुनी खेल.. नेता बनना हो तो बैलेट नहीं बुलेट का जोर होना जरूरी माना जाता रहा है.. और शाहाबाद के इस क्षेत्र में बुलेट के बल पर कई लोग नेता भी बने पर इन सबों में नम्बर एक की कुर्सी पर विराजमान है वर्तमान में तरारी विधानसभा से जद (यु) के विधायक नरेंद्र पाण्डेय उर्फ़ सुनील पाण्डेय. जिनके नाम मात्र से कभी थर्रा उठती थी शाहाबाद की धरती.. जिनका नाम लगातार दर्जन भर लूट और हत्याओं समेत कई संगीन मामलों में आता रहा.

अपने बॉस की हत्या का भी आरोप

अंडरवर्ल्ड डॉन और बॉस के नाम से विख्यात सिल्लू मिया से जरायम की दुनिया का गुर सिखने वाले सुनील के ऊपर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने अपने गुरु का ही कर दिया काम तमाम और बन गये अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह.

राजनीतिक जमीन

अपराधिक गतिविधियों के साथ खूब पैसा बनाया और तैयार कर ली राजनितिक जमीन.. फिर अपने सहोदर भाई हुलास को अपराध की दुनिया का बनाया नूर और खुद बन गये इलाके के विधायक. समय बीतता गया और भाई को भी राजनीति में लेकर आये बक्सर-आरा सीट से विधान पार्षद बनाकर..
पिता थे सेन में लेफ्टिनेंट

सुनील के पिता कामेश्वर पाण्डेय सेना में लेफ्टिनेंट थे पारिवारिक हालात ऐसे बने की उन्हें नौकरी छोड़ कर वापस गाँव आना पड़ा उस दौर में यादवों के आतंक से रोहतास जिले का नवाडीह गाँव के लोग परेशान थे उनकी जमीनें हड़पी जाने लगी थी.. ऐसी परिस्थिति में परिवार के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सुनील के पिता कामेश्वर पाण्डेय गाँव की राजनीति में हस्तक्षेप करने लगे. लिहाजा उनके दुश्मनों की संख्या बढ़ने लगी तब उन्होंने आपराधिक छवि के लोगों के साथ दोस्ती गांठनी शुरू की.

और उसके बाद शुरू हुआ अपराध की दुनिया के लोगों का सुनील के घर आना-जाना.सुनील पाण्डेय भी इसी क्रम में इन दागदार लोगों के संपर्क में आये.. बचपन से पढ़ने में तेज तर्रार छात्र सुनील ने प्राकृत से एम ए किया है और पी एच डी की डिग्री भी ली है. लेकिन पढाई से कुछ ख़ास करने के बजाय अपराध की दुनिया में ही हाथ पाँव पसारा .

सिल्लू मियां से सम्पर्क

कुख्यात सिल्लू मियाँ और शेखर दादा जैसे लोगों से संपर्क में होने की वजह से क्षेत्र में उनका खौफ कायम हो गया. सन 1991 में फकत एक रिवाल्वर के लिए सुनील पाण्डेय के पिता की ह्त्या कर दी गयी. और इस ह्त्या में नाम आया कुख्यात रामू ठाकुर का. इधर सुनील पाण्डेय की आपराधिक छवि तैयार हो चुकी थी.इलाके के बाहर भी सुनील के कारनामों के चर्चे होने लगे थे.अब सुनील भी पिता की हत्या के बाद बदले की आग में जलने लगा था .

पिता की हत्या

पिता के हत्यारे से बदला लेना कभी सुनील की जिंदगी का एकमात्र मकसद बन गया था पिता के हत्यारे को सुनील ने मारकर बदला ले लिया.. उसके बाद सुनील पाण्डेय ने अपने पिता की विरासत संभालने का बीड़ा उठाया. और अपने पिता के दोस्तों के साथ उनके धंधों में कदम रख दिया. फिर क्या था एक झटके में इंजीनियरिंग का एक मेधावी छात्र क्राइम की दुनिया का हथियार बन गया.

इंजीनियरिंग की पढाई छोड़ी

सुनील के बारे में बताया जाता है की वह बैंगलोर में इंजीनियरिंग की पढाई कर रहे थे और उस दौरान वे पढाई में अव्वल आते रहे थे.. लेकिन पिता की हत्या के बाद पारिवारिक असुरक्षा के कारण उन्हें इंजीनियरिंग की पढाई बीच में ही छोडनी पड़ी थी. इंजीनियरिंग की पढाई के दौरान ही बैंगलोर के कुछ छात्र सुनील से उलझ गए थे और सुनील की पिटाई कर दी थी.

इस घटना से सुनील पाण्डेय के अन्दर बदले की आग पनप गयी थी और झगडे के कुछ दिनों बाद ही सुनील ने उस लड़के को चाक़ू मार दिया जिससे उनकी झड़प हुयी थी ..कारण चाहे जो भी रहा हो यह घटना सुनील के जीवन का पहला अपराध था.. इस घटना ने सुनील को सुनील से साहब बना दिया .. अब कॉलेज के छात्रों के बीच सुनील ‘साहब’ के नाम से जाना जाने लगा.

जारी… कल

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