विवादों से पुराना रिश्ता

बलात्कार संबंधीं अपनी टिप्पणी को लेकर आलोचना का सामना कर रहे सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने खेद जता दिया है पर विवादों से उनका पुराना रिश्ता रहा है.

रंजीत सिन्हा: विवादों से चोली दामन का रिश्ता

रंजीत सिन्हा: विवादों से चोली दामन का रिश्ता

दर असल सिन्हा ने कहा था कि “सट्टेबाजी को वैध घोषित कर देना चाहिए. और यदि कानून को लागू नहीं किया जा सकता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि कानून बनाए ही नहीं जाने चाहिए. यह कहना उतना ही गलत है जितना यह कहना कि यदि बलात्कार को रोका नहीं जा सकता तो पीड़ित को इसका आनंद उठाना चाहिए”.

उन्होंने कहा कि यदि अनजाने में उन्होंने किसी को आहत किया है तो वह इसके लिए खेद जताते हैं. उन्होंने कहा कि वह महिलाओं का बेहद सम्मान और आदर करते हैं तथा लैंगिक मुद्दों के प्रति प्रतिबद्ध हैं.
रंजीत सिन्हा इससे पहले भी कई बार अपने काम के तरीकों से भी विवाद के घेरे में आ चुके हैं.

आईबी विवाद

पिछले जून महीने में उन्होंने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में आईबी के एक आला अधिकारी को गिरफ्तार करने की बात कह कर हंगामा मचा दिया था. यह मामला तब शांत हुआ जब आईबी प्रमुख ने सीबीआई निदेशक से मिल कर अपना जोरदार विरोध दर्ज कराया था. दर असल इस मामले में आईबी के संयुक्त निदेशक के अधिकारी राजेंद्र कुमार से सीबीआई ने पूछताछ की थी. और इस बात के लिए आपत्ति जतायी थी कि उन्होंने इशरत जहां मामले में गुजरात को सूचना दी थी जो गलत था.

आरपीएफ विवाद

अभी हाल ही कुछ महीने पहले सीबीआई ने रेल घूस कांड में आरपीएफ के आला अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ा था. इसके बाद जब विवाद की परतें खुलने लगीं तो रंजीत सिन्हा पर आरोप लगे कि वह किसी जमाने में आरपीएफ के महानिदेशक थे और कुछ होने के बाद वहां से उन्हें हटना पड़ा था. ऑल इंडिया आरपीएफ एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि घूसखोरी उजागर करने के नाम पर सिन्हा आरपीएफ डीजी के रूप में हुए अपमान का बदला ले रहे हैं. एसोशियशन के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें घूसखोरी के आरोपों में ही यहां से हटाया गया था. एसोसिएशन के महासचिव उमाशंकर झा ने प्रमाणों के साथ बताया कि उन्होंने तीन अगस्त 2012 को ही केंद्रीय सतर्कता आयुक्त को चिट्ठी लिखकर आगाह कर दिया था कि रंजीत सिन्हा अभी सीबीआइ निदेशक बने भी नहीं हैं, मगर आरपीएफ में उनके पुराने पिछलग्गू अधिकारी रेलभवन में सबको चेतावनी दे रहे हैं कि सीबीआइ डायरेक्टर बनते ही उन सभी लोगों को सबक सिखाएंगे, जिन्होंने उन्हें निकलवाने में भूमिका निभाई थी.

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झा के मुताबिक, उन्होंने 28 अप्रैल 2010 को रेलमंत्री ममता बनर्जी से तत्कालीन आरपीएफ डीजी रंजीत सिन्हा व आइजी बीएस सिद्धू के भ्रष्टाचार की शिकायत की थी. ममता ने रेलवे बोर्ड में कार्यकारी निदेशक (सिक्युरिटी) नजरुल इस्लाम से जांच कराई थी. सीबीआइ सिद्धू के खिलाफ पहले से ही जांच कर रही थी. उसी जांच के आधार पर सिद्धू को उनके मूल काडर में भेज दिया गया था. आरपीएफ एसोसिएशन ने 20 जनवरी 2011 को रंजीत सिन्हा के खिलाफ मय प्रमाण 10 पेज की एक और तगड़ी शिकायत रेलमंत्री का भेजी. शिकायत सही पाई गई और अंतत: सिन्हा को भी 19 मई, 2011 को आरपीएफ से हटाकर कंपल्सरी वेटिंग में गृह मंत्रालय भेज दिया गया था.
रंजीत सिन्हा 1974 बैच के बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं.

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