विवाद होना ही था: नवनियुक्त सीबीआई निदेशक को हटाने की मांग

केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई के नए निदेशक की नियुक्ति उसके गले की फांस बनती जा रही है.भाजपा ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर इस नियुक्ति को रद्द करने की मांग की है.जबकि टॉप लेवल के आई पीएस अधिकारियों की नाराज़गी यह है की नियुक्ति में वरिष्ठ अधिकारियों को दर किनार कर दिया गया.

बीजेपी का सवाल है कि संसद में लोकपाल ड्राफ्ट बिल रखे जाने से कुछ घंटे पहले ही नए सीबीआई की नियुक्ति क्यों गई?

मना जा रहा है की रंजीत की नियुक्ति में जातीय लाबी ने भी महतवपूर्ण भूमिका निभाई है.

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रंजीत सिन्हा को 22 नवंबर को सीबी आई का निदेशक नियक्त किया गया था. मौजूदा निदेशक 30 नवम्बर को रिटाएर हो रहे हैं. भाजपा ने सवाल उठाया है कि आम तौर पर इस पद पर नयी नियुक्ति एक दो दिन पहले की जाती है.

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली की ओर से पीएम को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि प्रस्तावित लोकपाल कानून में व्यवस्था है कि सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति पीएम, विपक्ष के नेता और देश के चीफ जस्टिस की कमिटी के द्वारा होगी. बीजेपी की नाराजगी है कि नए डायरेक्टर को अपॉइंट करने में इस प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया. दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि लोकपाल का ड्राफ्ट अभी कानून नहीं बना है.

इधर इस मामले में दूसरा गंभीर विवाद दिल्ली के पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार द्वारा उठाया गया था. नीरज ने इसके खिलाफ कैट में अपील की थी. हालांकि उन्हों ने रंजीत की नियुक्ति की घोसना के बाद वापस ले ली.

नीरज कुमार द्वारा अपील वापस लेने की वजह भी तकनीकी बताई जा रही है. सीवीसी ऐक्ट के तहत नियुक्ति की घोषणा के बाद स्टे आदि की गुंजाइश ज्यादा नहीं रहती है.

आईटीबीपी के प्रमुख रंजीत सिन्हा को निदेशक नियुक्त करने की घोषणा सरकार की तरफ से कल शाम को की गई. सूत्रों के मुताबिक विवाद देश के टॉप आईपीएस ऑफसरों के बीच नाराजगी की चर्चा कई दिनों से है. यह चर्चा तभी शुरू हो गई थी, जब पैनल सलेक्ट कमिटी ने तीन नाम तय किए थे. इनमें रंजीत सिन्हा के अलावा एनआईए के प्रमुख एस.सी. सिन्हा और यूपी कॉडर के अतुल गुप्ता के नाम थे.

सलेक्ट कमिटी ने नीरज कुमार, सीबीआई के मौजूदा स्पेशल डायरेक्टर वी.के. गुप्ता और उड़ीसा पुलिस के डीजी प्रकाश मिश्रा के नाम को रिजेक्ट कर दिया था. पैनल ने जिन तीनों नामों को सरकार के पास भेजा था, सरकार की अपॉइंटमेंट कमिटी को उन्हीं में से डायरेक्टर का नाम तय करना होता है. सूत्रों के मुताबिक, पैनल कमिटी ने सीनियरिटी ध्यान में नहीं रखा. सीनियरिटी को ताक पर रखकर यूपी कॉडर के अतुल गुप्ता का नाम तीन नामों में रख दिया गया।

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