संविधान ने सौंपी है हिंदी के विकास की जिम्‍मेवारी

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने आज कहा कि संविधान ने हिंदी के विकास की जिम्मेदारी सौंपी है, इसलिए जरूरी है कि अधिक से अधिक कार्य इस भाषा में किये जायें।

श्री रीजीजू ने पटना में संयुक्‍त क्षेत्रीय राजभाषा सम्‍मेलन एवं पुरस्‍कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुये कहा कि संविधान ने हम सब पर राजभाषा हिंदी के विकास और प्रयोग-प्रसार का दायित्‍व सौंपा है। राजभाषा होने के कारण हमारा कर्तव्‍य है कि हम ज्‍यादा से ज्‍यादा कार्य हिंदी में करें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाषा किसी भी समाज और देश की आत्‍मा होती है तथा भाषा में बहुत ताकत होती है। उन्‍होंने कहा कि दूसरी भाषाएं सीखनी चाहिए, लेकिन ऐसा करते समय अपनी मातृभाषा और राजभाषा को भूल जाना तर्कसंगत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में हिंदी भाषा की अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण भूमिका रही है, जिसे आगे बढाते हुए विभिन्‍नता में एकता के लिए कार्य करना होगा।

 

श्री रीजीजू ने कहा कि लोगों को यह संदेश देना होगा कि राजभाषा हिंदी सर्वश्रेष्‍ठ है और यह कार्य सामूहिक सहयोग तथा नैतिक उत्तरदायित्व की भावना से ही संभव है। उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक प्रयोग से भाषा की व्यापकता में वृद्धि होती है, भाषा समृद्ध होती है और उसका स्‍वरूप निखरता है। यह समझना जरूरी है कि देश के लोगों की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्‍कृतिक सभी प्रकार की अपेक्षाओं को पूरा करने वाली योजनाओं एवं कार्यक्रमों को आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाना सरकारी तंत्र का अति महत्‍वपूर्ण कर्तव्‍य है और उसकी सफलता की कसौटी भी।

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