सरकार और अखबार

बिहार सरकार समय समय पर अखबारों से रिश्ते को लेकर आलोचना झेलती रही है. एक बार फिर राज्य सरकार और एक अखबार के रिश्ते उजागर हुए हैं जो विज्ञापन के द्वारा एक दूसरे को खुश करने का है.

विज्ञापन का घनचक्कर: कौन किसे खुश करने में लगा है?

संजय कुमार

हालत यह है कि उपयोगिता समाप्त होने के बाद सरकारी विज्ञापन छापे जा रहे है तथा सरकार राशि का भुगतान भी कर रही है ,जो दर्शाता है कि अखबार और सरकार के बीच का रिश्ता नियमों से परे हैं.

बिहार सरकार जनता की गाढ़ी कमाई में से कर वसूल इसको किस प्रकार दुरूपयोग कर रही है ,इसकी बानगी पटना से प्रकाशित दैनिक प्रभात खबर के 24 जनवरी, 2013 के अंक को देखने से अहसास होता है.

प्रभात खबर ,पटना के मगध संस्करण के 24 जनवरी के पेज सं-15 पर हाफ पेज का रंगीन विज्ञापन ‘बिटिया बचाओ अभियान ‘शीषक से छपा है. बिहार सरकार के सूचना एंव् सम्पर्क विभाग से जारी विज्ञापन सं-पि.आर .नं-13771 स.(नि.नि.) 12-13 में कहा गया है की क्न्या भ्रून हत्या निमूल करने ‘बिटिया बचाऒ अभियान” शिशु मुत्यु दर कम करने हेतु “राष्ट्रीय सम्मेलन” आयोजित किया जा रहा है. दिंनाक-23 जनवरी 2013 ,समय -सुबह 10.30 बजे ,स्थान :-एस.के.मेमोरियल हाल ,गांधी मैदान ,पटना उक्त विज्ञापन में कहा गया है की आप सादर आमंत्रित हैं.

वहीं दूसरी ऒर प्रभात खबर ,पटना के मगध संस्करण के २४ जनबरी 2013 के पेज सं:-2 पर 23 जनवरी के उदधाटन का समाचार छपा है. जिसका शिषेर्क है :-सूबे में बनेगी समेकित स्वास्थ्य नीति-मॊदी ,2017 तक राज्य में शिशु मुत्यु दर प्रति हजार पर 44 से घटा कर 30 करने का लक्ष्य.

सवाल उठता है कि आखिर क्यों कार्यक्रम समाप्ति के एक दिन बाद विज्ञापन छापा जा रहा है.बिहार सरकार की मंशा विज्ञापन के जरिये कायर्यक्रम का प्रचार -प्रसार करना है या सिफ अख़बार को फायदा पहुचाना.

ऐसे विज्ञापन का भुगतान राज्य सरकार क्यों कर देती है. इससे पहले भी ऐसा कारनामा पटना के दैनिक अखबार कर चुके हैं.

इस संबंध में प्रभात खबर के विज्ञापन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि अखबार विज्ञापन लेते हैं, उसमें छपे मैटर से उन्हें लेना देना नहीं होता. यह विज्ञापन देने वाली एजेंसी को तय करना होता है कि विज्ञापन कब छपे. हालांकि इस संबंध में सरकार की तरफ से कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

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