‘सर्वेक्षण पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता चुनाव आयोग’

कांग्रेस पार्टी चुनाव पूर्व सर्क्षण पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में है.पर चुनाव आयोग इस पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता. आखिर क्यों?sy.quraishi

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा है कि चुनाव आयोग चुनाव सर्वे पर तभी प्रतिबंध लगा सकता है जब इस संबंध में कोई कानून बनाया जाये. कुरैशी ने हार्ड न्यूज के साकिब नकवी से बात करते हुए कहा कि कानून बनने के बाद ही पेड और मोटिवेटेड चुनाव सर्वेक्षण पर रोक लगाया जा सकता है.

ध्यान रहे कि अटॉर्नी जनरल जी. वाहनवती ने सर्वेक्षण पर रोक लगाने पर अपनी सहमति जता दी है लेकिन कानून मंत्रालय चाहता है कि इस पर आखिरी फैसला चुनाव आयोग करे। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों से ओपिनियन पोल पर राय मांगी थी कि क्या इसे बैन कर देना चाहिए। अक्टूबर के पहले हफ्ते में ये राय मांगी गई थी

ध्यान रहे कि इन दिनों पेड चुनाव सर्वेक्षण की खूब चर्चा है और कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि चुनाव सर्वेक्षणों पर रोक लगाया जाये.

कुरैशी ने कहा कि चुनाव सर्वेक्षण, अगर वैज्ञानिक और ईमानदार हों तो यह बुरा नहीं है. उन्होंने कहा विकसित देशों में सर्वेक्षण नियमित रूप से होते रहते हैं और उपयोगी भी रहे हैं. लेकिन भारत में जहां पेड न्यूज एक अकाट सच्चाई है,चुनाव सर्वेक्षणों पर संदेह किये जाने की काफी गुंजाईश है. और अगर ये संदेहस्पद हैं तो इससे चुनाव प्रभावित हो सकते हैं.

उन्होंने कहा कि संसद ने अपने विवेक से चुनाव बाद के सर्वेक्षण पर रोक लगा दिया था पर चुनाव पूर्व सर्वेक्षण को जारी रखा था. ऐसे में यह एक बहस मुद्दा बनता है तो अच्छी बात है.

कुरैशी ने सोशल मीडिया का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया काफी सशक्त है, इतना कि ये देश में आग लगाने के लिए काफी हैं. आखिरकार यह मीडिया ही है इसलिए इसे आप मेन मीडिया से अलग नहीं मान सकते हैं. चुनाव आयोग फिलहाल इस बात पर चिंता कर रहा है कि राजनीतिक पार्टियों ने मेनस्ट्रीम मीडिया की तरह अपने प्रचार प्रसार पर सोशल मीडिया पर कितना खर्च कर रही हैं. आयोग को आचार संहिता के तहत मीडिया पर किये गये खर्च या हेट स्पीच को मॉनिटर करने का अधिकार है.

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