सवाल ‘बृजनंदन रविदास’ के दलित टोले से बाहर निकालने का भी है

नीतीश कुमार के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद से ही हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्‍त को किसी दलित टोले में जाकर किसी महादलित से झंडा फहरवाने का सिलसिला शुरू हुआ था, जो निरंतर जारी है। इस टोले के चयन में पटना के आसपास के गांव को प्राथमिकता दी जाती है। इस बार 15 अगस्‍त को झंडा फहराने के लिए फुलवारी प्रखंड के चिलबिली गांव को चुना गया था। इसकी दूरी अनीसाबाद से करीब 5 किलो मीटर होगी।cm 1

वीरेंद्र यादव

 

झंडोत्‍तोलन के लिए इसी गांव के निवासी बृजनंदन रविदास को चुना गया था। चिलबिली गांव में सीएम के आगमन को लेकर गांव में भव्‍य तैयारी की गयी थी। झंडा फहराने के लिए मंच बना था तो ग्रामीणों के लिए वाटरप्रूफ शेड का भी निर्माण किया था। कुछ घंटे के लिए चिलबिली गांधी मैदान में तब्‍दील हो गया था। सीएम के रास्‍ते की पूरी घेराबंदी की गयी थी। सुरक्षा का पुख्‍ता इंतजाम किया गया था। अनिसाबाद के बल्‍मीचक से लेकर समारोह स्‍थल तक सड़कों पर पैबंद लगा दिया था। सड़कों की खाई को पाट दिया गया था। सड़कों से धूल न उड़े, इसके लिए पानी भी छिड़कवाया गया था। यानी सीएम की नाराजगी से बचने के लिए हरसंभव कोशिश की गयी थी। पटना के प्रमंडलीय आयुक्‍त समेत सभी वरीय अधिकारी मौजूद थे। सीएम ने करीब 20 मिनट के भाषण में शराबबंदी से लेकर विकास की बात की। गांवों में शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य की सुविधाएं मुहैया कराने का वादा भी किया।cm 2

 

सवर्णों या पिछड़ों के गांव में क्‍यों नहीं

लेकिन सवाल इससे आगे का है। हर वर्ष झंडोत्‍तोलन के लिए महादलित टोले का ही चयन क्‍यों किया जाता है। दलित वर्ग के लोग दलित टोले से बाहर क्‍यों नहीं निकलते हैं। सवर्ण या पिछड़ी जातियों के गांवों में रविदास, धोबी, मुसहर या पासी भी बसते हैं। इन गांवों में राजकीय समारोह आयोजित कर उन गांवों के दलितों में सवर्णों और पिछड़ों के मुकाबले खड़ा होने के लिए आत्‍मबल का संचार किया जा सकता है। उनके अंदर बराबरी का भाव पैदा किया जा सकता है। सवाल सरकार की मंशा पर नहीं है। लेकिन दलितों को दलित के मंच पर ही ‘कैद’ रखने की कोशिश क्‍यों की जा रही है। दलितों को खुले मंचों पर भी लाया जाना चाहिए। इसका एक व्‍यापक संदेश जाएगा और समाज में एक नयी चेतना भी पैदा होगी।

कौन हैं बृजनंदन रविदास

चिलबिली गांव के ही निवासी हैं बृजनंदन रविदास। राजनीति से उनका ज्‍यादा वास्‍ता नहीं है, लेकिन राजनीति से अनभिज्ञ भी नहीं हैं। सीएम के साथ मंच पर बैठे बृजनंदन रविदास के चेहरे पर खुशी का भाव छलक आता है। वे उसे छुपाते भी नहीं हैं। इसके लिए सीएम के प्रति आभार भी जताते हैं। सीएम की उपस्थिति में झंडा फहराना उनके लिए अकल्‍पनीय घटना थी और इस समृति को वे सहेज कर रखना चाहते हैं।

One comment

  1. राजनैतिक दॉव पेंच तो नहीं

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