सस्पेंशन पर सवाल

एक जनवरी 2009 से 13 फरवरी 2013 के बीच उत्तर प्रदेश में 5 आईपीएस व 24 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का निलंबन किया जा चुका है लेकिन अभी तक एक भी अधिकारी को दोषी साबित नहीं किया जा सका.up-police

लखनऊ की सामाजिक कार्यकर्ता और आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर द्वार प्राप्त किये गये सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह बात सामने आई है.

जिन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया है उनमें अजय कुमार मिश्र, ओपी सागर, डीके राय जेएन सिंह, और आरपी चतुर्वेदी के नाम शामिल हैं.

सस्पेंड किये गये आईपीएस अधिकारियों में दो ऐसे थे जिनके खिलाफ कोई दोष नहीं पाया गया और उनका नलंबन वापस ले लिया गया. इनमें एक को मात्र दो महीने के भीतर तैनाती दे दी गयी. जबकि अजय मिश्र को एक साल तीन महीने तक सस्पेंशन में रहना पड़ा. जबकि बाकी के खिलाफ अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सका है.

सस्पेंड किये गये राज्य सेवा के अधिकारियों में एडिशनल एसपी और 16 एसपी स्तर के हैं.

इन में एक ट्रैफिक एसपी बीएन तिवारी को अपने जूते का फीता एक पुलिस काउंस्टेबुल से बंधवाने के आरोप के मद्देनजर बर्खास्त कर दिया गया था, पर उनके खिलाफ प्राथमिक जांच में कोई दोष नहीं पाया गया.
और उनके सस्पेंशन को मात्र एक महीना में खत्म कर दिया गया

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