सांप्रदायिकता से देश की पहचान को खतरा

कांग्रेस के वरीय नेता और पूर्व मंत्री शमायले नबी ने कहा है कि देश की पहचान और उसकी अस्मिता के लिए सांप्रदायिकता सबसे बड़ी चुनौती है। इससे मुकाबले के लिए सेक्‍यूलर फोर्स को एकजुट होना चाहिए। आज पटना में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्‍होंने कहा कि महाराष्‍ट्र और हरियाणा में भाजपा की जीत एक चेतावनी है। बिहार में राजद, जदयू व कांग्रेस के गठबंधन का स्‍वागत करते हुए उन्‍होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में उम्‍मीदवारों के चयन में गठबंधन को सावधनी बरतनी चाहिए।

बिहार ब्‍यूरो प्रमुख

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श्री नबी ने स्‍वीकार किया कि गठबंधन में पार्टी के नेता एकजुट हो जाते हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं में एकजुटता नहीं आ पाती है। नेताओं को चाहिए कि ऊपर से नीचे तक एकता बने, ताकि सांप्रदायिक शक्तियों का मुकाबला किया जा सके। उन्‍होंने मुसलमानों से जुड़े मामलों को उठाते हुए कहा कि सच्‍चर कमेटी की अनुशंसा के अनुसार, सरकारी सेवाओं में मुसलमानों के लिए 10 फीसदी आरक्षण दिया जाए। मौलाना मजहरुल हक अरबी फारसी विश्‍वविद्यालय के अपने कैंपस के लिए जमीन उपलब्‍ध करायी जाए और निर्माण कार्यों के लिए राशि आवंटित की जाए। आतंकवाद के नाम पर मुसलमान युवकों के खिलाफ होने कार्रवाई पर रोक लगायी जाए।

 

उन्‍होंने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि भापजा के साथ रहने वाली हर पार्टी सांप्रदायिक सरोकारों की पोषक हैं और हम उनका विरोध करते हैं। श्री नबी ने कहा कि मुसलमानों की तरक्‍की और विकास के लिए शिक्षा एक महत्‍वपूर्ण कारक है और इसके लिए सरकार के साथ सामाजिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए।

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