साइकिल की ‘सवारी’ से वंचित हो सकते हैं बाप-बेटा

समाजवादी पार्टी के मुलायम गुट और अखिलेश गुट के साइकिल चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर दावे पेश करने के बाद अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है।  अब चुनाव आयोग को तय करना है कि सपा का असली हक़दार कौन है। उसके आधार पर ही साइकिल चुनाव  चिह्न का आवंटन होगा, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में पांच से छह महीने का समय लग सकता है। इस बीच, पार्टी के कुछ  नेता श्री मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र अखिलेश यादव के बीच सुलह करने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें इसमें सफलता भी मिल सकती है।cymla

 
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अधिकतर विधायक सांसद तथा बड़े नेता और कार्यकर्ता अखिलेश यादव के साथ हैं। इसलिए उनका पलड़ा भारी है और मुलायम सिंह यादव पार्टी में कमज़ोर स्थिति में  आ गए हैं। यह देखते हुए मुलायम गुट को सुलह की अधिक जरूरत है ।  सूत्रों का कहना है कि चुनाव आयोग साइकिल चुनाव चिह्न को जब्त कर दोनों गुट को अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित कर सकता है, लेकिन उससे पहले वह दोनों गुटों से उनके दावे को लेकर उनसे हलफनामा भी मांगेगा। दोनों गुटों को अपने तर्कों के साथ साक्ष्य भी पेश करने होंगे। उन सभी पहलुओं, कागजातों तथा साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद ही आयोग किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा लेकिन इसमें कई महीने लग जायेंगे। इसलिए आयोग उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए अंतरिम फैसला लेकर फ़िलहाल दोनों गुटों को नए चुनाव चिह्न आवंटित कर देगा ।

 
अखिलेश गुट की ओर से आज राज्यसभा सांसद राम गोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा ने चुनाव आयोग से मिलकर चुनाव चिह्न साइकिल पर अपना दावा पेश किया और यह भी कहा कि वही सपा के असली हक़दार हैं । कल श्री मुलायम सिंह यादव, अमर सिंह, शिवपाल यादव तथा जया प्रदा ने चुनाव आयोग से मिलकर चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोंका था।

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