सीएम पद से हटेंगे तो पत्रकार बनेंगे नीतीश

आज दोपहर में हम विधान सभा पहुंचे तो सत्‍ता पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों के नेता के चैंबर में सन्‍नाटा पसरा हुआ था। नीतीश कुमार और तेजस्‍वी यादव दोनों में से कोई विधान सभा नहीं पहुंचे थे। दोनों ही सदनों में भोजनावकाश हो चुका था। परिषद के पत्रकार कक्ष में थोड़ी देर बैठकर लौटे तो तेजस्‍वी अपने चैंबर में बैठे थे। हम भी बैठे। दो बजे से विधान सभा की कार्यवाही शुरू होने वाली थी। धीरे-धीरे विधायक भी पहुंचने लगे। इस दौरान तेजस्‍वी यादव ने राजद के उस विधायक से बात करने की कोशिश की, जिनको धमकी मिली थी। लेकिन उनका फोन ऑफ मिला। इस पर तेजस्‍वी ने कहा कि सदस्‍यों का मोबाइल ऑफ क्‍यों रहता है। उन्‍होंने धमकी मामले की विस्‍तृत जानकारी जुटाने का निर्देश एक विधायक को दिया। प्रवक्‍ताओं से भी कहा कि हर घटना को लेकर अपडेट रहिए। इसके साथ ही कहा कि जिस विषय पर सदन में चर्चा होनी हो या बाहर मुद्दा बनने वाला हो, उसका इनपुट एवं रिफरेंस भी संबंधित व्‍यक्ति के पास होना चाहिए। इस बीच हमने अपनी पुस्तक ‘संभावनाओं के सोपान’ की एक कॉपी तेजस्वी यादव को दी। थोड़ी देर में घंटी बजी और सभी हाउस जाने लगे।

 वीरेंद्र यादव, विधान सभा से 

कुछ देर और हम वहीं रुके और फिर आफिस जाने के लिए विधान सभा के मुख्‍य द्वार से बाहर निकलने लगे। इच्‍छा हुई, थोड़ा ‘राजा का दरबार’ भी देख लिया जाये। मुख्‍यमंत्री के चैंबर में कई पत्रकार बैठे हुए थे। हम भी बैठकी में शामिल हो गये। आरा में एक पत्रकार की मौत को लेकर चर्चा हो रही थी। मुआवजा से लेकर जांच तक बात हुई। सीएम ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। बात समीक्षा यात्रा पर आयी। सीएम का प्रवाह बढ़ा- अब तक हम सभी जिलों में तीन-तीन समीक्षा यात्रा और बैठक कर चुके हैं। पंद्रह के बाद समीक्षा यात्रा शुरू किये थे। समीक्षा बैठक के दौरान कई चीजों को जानने और समझने का मौका भी मिलता है। इससे कार्यों में गति भी आती है और प्रशासनिक सक्रियता भी बनी रहती है। पेंशन भुगतान को लेकर होने वाली लापरवाही भी समीक्षा यात्रा के दौरान ही समझ आयी। इसको ठीक किया। कुसहा तबाही के बाद कोसी में घर बनाये जा रहे थे। विकास यात्रा के दौरान हमने देखा कि इस घर में शौचालय ही नहीं है। हमने घर के साथ शौचालय बनवाने का आदेश भी दिया।

बात भीड़ की हिंसा पर आयी। मुख्‍यमंत्री ने कहा कि जो व्‍यक्ति घर में मार खाता है, वही भीड़ में उग्र हो जाता है। कोई मां-बाप की मार खाता है, भाई का मार खाता है, पत्‍नी की मार खाता है। वही भीड़ देखकर आक्रमक हो जाता है और हिंसा पर उतर आता है। ऐसे लोग कायर होते हैं। इसी चर्चा में एक पत्रकार ने कहा कि विकास योजनाओं पर निगरानी के लिए औचक निरीक्षण भी किया जाना चाहिए। इस पर मुख्‍यमंत्री बोले- हमको सलाह मत दीजिये। औचक निरीक्षण से कुछ होता नहीं है। सलाह देना हम जानते हैं। हम भी आप लोगों को सलाह दे सकते हैं। इ जिम्‍मेवारी (सीएम पद) से मुक्‍त होंगे तो आपका वाला (पत्रकारिता) ही काम करेंगे। तब हम भी सलाह देंगे आपको। एक बार तो जिम्‍मेवारी से मुक्‍त हुए थे, लेकिन लोगों ने फिर सौंप दिया। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार आये और मंत्रणा के लिए मुख्‍यमंत्री के साथ अंदर वाले कक्ष में चले गये। इसके बाद चाय के साथ हम भी बाहर निकल लिये।

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