सीतामढ़ी : पहली बार ‘रायजी’ के खेत का भंटा उखाड़ ले गये कुशवाहा

सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र 1957 में अस्तित्‍व में आया था। इसके प्रथम सांसद समाजवादी नेता जेबी कृपलानी निर्वाचित थे। इसके बाद से इस सीट से लगातार यादव की निर्वाचित होत रहे। 1977 में निर्वाचित श्‍याम सुंदर दास को छोड़कर 2009 तक यादव की निर्वाचित होते रहे। श्री दास की जाति स्‍पष्‍ट नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में रालोसपा के राजकुमार शर्मा (कुशवाहा) निर्वाचित हुए। नरेंद्र मोदी लहर में पहली बार रायजी के खेत (यादव बहुल संसदीय क्षेत्र) से कुशवाहा ‘सत्‍ता का भंटा’ उखाड़ ले गये। राजद के सीताराम यादव और जदयू के अर्जुन राय के बीच की लड़ाई में रामकुमार शर्मा की जीत आसान हो गयी।

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वीरेंद्र यादव के साथ लोकसभा का रणक्षेत्र – 9
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सांसद — रामकुमार शर्मा — रालोसपा — कुशवाहा
विधान सभा क्षेत्र — विधायक — पार्टी — जाति
बथनाहा — दिनकर राम — भाजपा — रविदास
परिहार — गायत्री देवी — भाजपा — यादव
सुरसंड — सैयद अबू दोजाना — राजद — सैयद
बाजपट्टी — रंजू गीता — जदयू — यादव
सीतामढ़ी — सुनील कुमार — राजद — कुशवाहा
रुन्नीसैदपुर — मंगीता देवी — राजद — यादव
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2014 में वोट का गणित
रामकुमार शर्मा — रालोसपा — कुशवाहा — 411265 (46 फीसदी)
सीताराम यादव — राजद — यादव — 263300 (29 फीसदी)
अर्जुन राय — जदयू — यादव — 97186 (11 फीसदी)
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सामाजिक बनावट
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सीतामढ़ी यादव बहुल संसदीय क्षेत्र है। सर्वाधित वोटर यादव ही हैं। इसके बाद मुसलमानों की आबादी होगी। तीसरे स्‍थान पर कुशवाहा मतदाताओं की संख्‍या है। इस क्षेत्र में सवर्णों की आबादी कम है। सवर्णों में राजपूत से ज्‍यादा भूमिहार हैं। अतिपिछड़ी जातियों में मल्‍लाह और धानुक हैं। मुसलमानों में 60 से 65 प्रतिशत पसमांदा हैं। जीत-हार के लिए अकेले यादव ही काफी हैं। यही कारण है कि सभी प्रमुख पार्टी यादव की प्रत्‍याशी देते रहे हैं। पिछले चुनाव में मजबूत त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा गठबंधन को बढ़त मिली और अतिपिछड़ा प्रधानमंत्री के नाम पर अतिपिछड़ी जातियों का बड़ा हिस्‍सा एनडीए की ओर हो लिया।
उपेंद्र कुशवाहा का अंक गणित
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पिछले लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा को तीन सीट मिली थी। तीनों सीट उपेंद्र कुशवाहा की पंसद से तय हुए थे। काराकाट से उपेंद्र कुशवाहा व जहानाबाद से अरुण कुमार का चुनाव लड़ना तय था। लेकिन सीतामढ़ी में रालोसपा को उम्‍मीदवार चुनने में परेशानी हो रही थी। सीतामढ़ी में लगातार यादव की जीत परेशानी की वजह थी। उपेंद्र कुशवाहा को सीतामढ़ी से कोई यादव उम्‍मीदवार नहीं मिल रहा था और दूसरा उपेंद्र कुशवाहा रालोसपा को कोईरी की पार्टी की छवि को पुख्‍ता करना चाहते थे। इसलिए अपने एक कोईरी कार्यकर्ता को उन्‍होंने टिकट थमाया। तीन टिकट में दो कुशवाहा और एक भूमिहार। यह समीकरण एनडीए के लिए उचित लग रहा था। कोईरी वोटों के साथ यादव, मुसलमान व कुर्मी वोटों को छोड़कर एक बड़ा हिस्‍सा एनडीए के साथ हो गया। इसका लाभ रालोसपा को मिला और मोदी लहर में उधिया कर रामकुमार शर्मा संसद में पहुंच गये।
कौन-कौन हैं दावेदार
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सीतामढ़ी सीट पर राजद के टिकट के प्रमुख दावेदार पूर्व सांसद सीताराम यादव को माना जा रहा है। इसके अलावा स्‍थानीय निकाय कोटे से निर्वाचित विधान पार्षद दिलीप राय भी चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। सीताराम यादव ने बातचीत में कहा कि वे पूरी तरह चुनाव की तैयारी में हैं। उधर एनडीए में सीट का भविष्‍य अभी स्‍पष्‍ट नहीं है। इस सीट पर जदयू भी अपना दावा जता सकता है। यादव बहुल इस सीट पर भाजपा की कोई रुचि‍ नहीं है। वैसे भाजपा अभी ‘त्‍याग’ के मूड में है। भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी के अलावा सबकुछ त्‍याग सकती है। वैसी ही नीतीश कुमार मुख्‍यमंत्री की कुर्सी के अलावा सबकुछ त्‍याग सकते हैं। दो से अधिक सीटों का दावा भी वे त्‍याग सकते हैं। त्‍याग के मूड में तो राजद भी है। पिछले चुनाव में राजद ने 27 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार दिये थे। इस बार 20 पर भी संतोष करने को तैयार है। त्‍याग का फायदा नजर आये तो राजद सीतामढ़ी सीट भी त्‍याग सकता है। वैसे में सीताराम यादव की तैयारी धरी की धरी रह जाएगी। बताया जा रहा है कि शरद यादव की नवगठित पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल तीन सीटों पर नजर लगाए हुए है, उसमें मधेपुरा, सीतामढ़ी और जमुई को माना जा रहा है। कांग्रेस के रीगा विधायक अमित कुमार भी दावेदार बताये जाते हैं। अभी दोनों ही गठबंधनों की स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है। हर दावेदार अपना-अपना नाद, खूंटा और पगहा टाइट कर रहे हैं।

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