सुधीर कुमार को केवल बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के मुखिया की हैसियत से ही फंसाया गया!

-आइएएस सुधीर कुमार के जमानत आवेदन पर हुई सुनवायी, तीन अप्रैल को रखा जायेगा पक्ष

बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामविनय सिंह ने विशेष अदालत को बताया कि सुधीर कुमार को केवल बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के मुखिया की हैसियत से ही फंसाया गया है. जबकि, एसआइटी अब तक उनके खिलाफ कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं जुटा पायी है. अधिवक्ता ने आदलत को बताया कि प्रश्नपत्र व ओएमआर अलग-अलग व्यक्ति तैयार करते हैं, जबकि उसे सील लिफाफे में सीधे प्रिंटिंग प्रेस को भेज दिया जाता है तथा परीक्षा के दो-तीन दिन पूर्व ही संबंधित जिलाधिकारी के कोषागार में उसे भेज दिया जाता है. इसमें अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं होती.

 

आइएएस सुधीर कुमार समेत पांच लोगों के जमानत अर्जी पर सुनवायी आज

आइएएस सुधीर कुमार समेत पांच लोगों के जमानत अर्जी पर सुनवायी 

नौकरशाही डेस्क, पटना
बीएसएससी पेपर लीक मामले में गुरुवार को निगरानी-1 के विशेष जज मधुकर कुमार की अदालत में आइएएस सुधीर कुमार के जमानत आवेदन पर आंशिक सुनवाई हुई. दोनों पक्ष को सुनने के बाद विशेष अदालत ने बचाव पक्ष को निर्देश दिया कि अभियोजन द्वारा जो भी केस डायरी के माध्यम से आरोप लगाये जा रहे हैं, उसका सिलसिलेवार जवाब दें. मामले की अगली सुनवाई तीन अप्रैल को होगी. इधर, गुरुवार को इसी मामले में मंजू देवी, विपिन कुमार, आशुतोष, अनीश व अटल बिहारी राम के जमानत आवेदन पर सुनवाई होनी थी, लेकिन अदालत ने जहां मंजू देवी के जमानत आवेदन पर सुनवाई के लिए तीन अप्रैल की तरीख तय की है. वहीं, अन्य चार आरोपितों के जमानत आवेदन पर सुनवाई के लिए विशेष अदालत ने 11 अप्रैल की तारीख निर्धारित की है. बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामविनय सिंह ने विशेष अदालत को बताया कि सुधीर कुमार को केवल बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के मुखिया की हैसियत से ही फंसाया गया है. जबकि, एसआइटी अब तक उनके खिलाफ कोई पुख्ता साक्ष्य नहीं जुटा पायी है. अधिवक्ता ने आदलत को बताया कि प्रश्नपत्र व ओएमआर अलग-अलग व्यक्ति तैयार करते हैं, जबकि उसे सील लिफाफे में सीधे प्रिंटिंग प्रेस को भेज दिया जाता है तथा परीक्षा के दो-तीन दिन पूर्व ही संबंधित जिलाधिकारी के कोषागार में उसे भेज दिया जाता है. इसमें अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं होती. कोषागार से डीएम की देखरेख में ही सीधे प्रश्नपत्र व ओएमआर परीक्षा सेंटरों को भेज दिये जाते हैं. बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि तत्कालीन अध्यक्ष के मोबाइल, लैपटॉप से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि सुधीर कुमार ने प्रश्नपत्र लीक करने में कोई भूमिका निभाई है. यहां तक की एसआइटी द्वारा इनके सरकारी आवास की तलाशी के दौरान भी कोई प्रश्नपत्र बरामद नहीं हुआ था.
हजारीबाग वाले आवास पर जाओ प्रश्नपत्र वहीं मिल जायेगा
वहीं दूसरी ओर अभियोजन पक्ष की ओर से निगरानी के विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार सिन्हा ने अदालत को बताया कि सुधीर कुमार के रिश्तेदार आशीष कुमार की स्वीकारोक्ति बयान में यह आया है कि (जो रिश्तेदार परीक्षा दे रहे थे) सुधीर कुमार ने बताया था कि हजारीबाग वाले आवास पर जाओ प्रश्नपत्र वहीं मिल जायेगा. बाद में आशीष कुमार ने ही अन्य लोगों को भी पेपर लीक किया है.

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