सुन लीजिए! चौरसिया, रोहित, सुमित, सुधीर आप झूठे साबित हो चुके हैं

अर्नव गोस्वामी,सुधीर चौधरी,दीपक चौरसिया,रोहित सरदाना, सुमित अवस्थी ध्यान से सुनिए. फर्जी विडियो पर देश में कोहराम मचा कर आप अपना छीछालेदर करवा चुके हैं, फिर भी ठहरिये और जनता की बात सुन लीजिए. मुकेश कुमार की कलम सेjournalists modified

आप पत्रकारों को पता है कि  जब “वॉच ओवर द वॉचमैन” ही अगर ग़लत हो जाए तो क्या होगा ? कुछ ऐसा ही होता रहेगा जैसे कोई चौकीदार ही चोर की भूमिका में आ जाएगा.

आपने विडियो की सत्यता का दावा नहीं किया फिर भी दावे के साथ विडियो को सही साबित करते रहे.जब मीडिया अपराध या घटना की जाँच न करके ख़ुद मुक़दमा चला कर सज़ा देने लगता है, यंहा तक ठीक हो सकता है. पर संकट तब आता है जब आप सत्ता के इशारों पर यह करने-कहने लगते हैं

. नेशन वॉंट्स टू नो के जुमले से किस देश और राष्ट्र की बात आप करते हो. जो TAM (टैम)में 12000 और BARK (बार्क) में 22000 घरों का राष्ट्र जो आपने अपनी सुविधा के अनुसार बनाया है. यह देश आपके बनाए नेशन से बहुत बड़ा है.

हम यहा वो लिंक दे रहे हैं जो जेएनयू छात्रों को देशद्रोही घोषित करने के लिए डॉक्टर्ड करके बनाया गया था. इसे एबीपी और टीवी टुडे ने फर्जी करार दिया है 

आपने कुएँ में गिरे मेंढक कहानी सुनी होगी. अर्नव, आपकी पक्षधरता तब सामने आ जाती है जब वसुंधरा राजे और ललित मोदी की घटना को इतना लम्बा तानते हो और कीर्ति आज़ाद-अरुण जेटली मामले को एक दिन में निपटा देते हो और वो भी अपने परसेप्शन के साथ. जब सरकार का पक्ष रखने-रखवाने के लिए सरकार और न्यायालय का एक डिवेट करवाते हो ताकि सरकार के पक्ष में हवा बनाई जा सके.

रजत शर्मा, आप जो ‘आप की बात’ करते हैं वो अब ग़लत बात साबित हो गई. कन्हैया के मामले में आपने जो सूत्रों के हवाले से ख़बर तानी थी वो फ़र्ज़ी निकली. आपने कन्हैया के ख़त के बारे में बताया कि जोकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अनुसार दबाव देकर लिखाया गया था. यह ख़बर आने के बाद आपने बस्सी की पोल नहीं खोली. बस्सी पर आपने तब भी स्टोरी नहीं कि किस तरह पटियाला कोर्ट के अंदर और बाहर जंगलराज का माहौल था और इसके सूत्रधार अब तक ग़ायब हैं.

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सुधीर चौधरी, आपका सुपारी किलर का इतिहास पुराना है. उमा खुराना मामला याद होगा आपको.आपने उमा खुराना पर गलत आरोप लगाया कि वो अपनी छात्रा से जिस्मफरोशी करवाती हैं. इस स्टिंग को देखने के बाद देशभक्तों का एक हुजूम आता है जो अपनी भारत माता के प्रति देशभक्ति साबित करने के लिए एक महिला उमा खुराना को लगभग निर्वस्त्र कर देती है.

सुधीर फिर आपने एक स्टिंग किया है और दलाली किया जिसके लिए आप जेल भी जाते हैं, और जेल जाते समय आप धमकी देते हैं ‘तुम्हें पता नहीं है कि मैं कौन हूं’. आपको लोगों के टैक्स के पैसा से Z प्लस की सुरक्षा मुहैया कराया जाता है. जब फ़र्ज़ी विडियो के आधार पर किसी मुद्दे को तानते हैं तो आपको शर्म नहीं आती कि लोगों में कौन सा ज़हर आप भर रहे हैं.

दीपक चौरसिया, याद है आपको जब आप DD न्यूज़ के मुख्य सलाहकारी सम्पादक थे,2004 आम चुनाव के परिणाम प्रस्तुत करने के दौरान सुधीन्द्र कुलक़र्नी ने आपको कहा था ” मुझको लगता था कि आपकी रीढ़ की हड्डी है पर आज पता चला कि आपकी रीढ़ की हड्डी है ही नहीं” फिर कई दिनों तक आपके पास कोई काम नहीं था तब शिमला  में अटल जी से आपकी मुलाक़ात हुई फिर आप “आज तक ” में ले लिए गए.

रोहित सरदाना, सत्ता की कठपूतली मत बनो. ग़ीली मिट्टी सी हाँ-हाँ मत करो, जड़ पकड़ो. पत्रकारिता का सामान्य सा नियम है,जो बहुत ही आधारभूत है कि-ख़बर की सत्यता की जांच करने के बाद ही छापने-दिखाने-सुनाने की बात.फ़्रेंच विचारक पियरे बोर्दू ने अपनी किताब ‘आन टेलिविज़न’ में बताया है कि “चैनल वाले किसी भी घटना को सबसे पहले दिखाने और पेश करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं. एक दूसरे से आगे रहने की होड़ का नतीजा यह हो रहा है कि सभी एक दूसरे की नक़ल कर रहे हैं” “दुर्घटना से देर भली मुहावरा” मीडिया के लिए लागू क्यों नहीं किया जा सकता. क्या अब ये सुपारी मीडिया किलर सन्नाटे में चीख़-चीख़ कर यह तानेंगे कि वो वीडिओ जिसके आधार पर हम लोगों में ज़हर भर रहे थे वो नक़ली था और हम दोषी हैं.

सुमित अवस्थी आप और दीपक चौरसिया को कन्हैया और उमर खालिद पर अपने स्टुडियो में बुला कर उनके ऊपर जल्लाद की तरह चिल्ला रहे थे. ऐसे जैसा अगर आपका बस चलता तो स्टुडियो में ही इन दोनों को सजाये मौत सुना देते. अब जबकि सच्चाई सामने आ चुकी है. एबीपी और टीवी टुडे ने सारे विडियो को डाक्टर्ड और फर्जी बता दिया है तो क्या उम्मीद की जाये कि आपकी आत्मा जागेगी. शायद नहीं. आप पर कोई असर हो इसकी उम्मीद नहीं है.

15 comments

  1. RSS has always been an anti national org.There is no use of this organisation- they want power and money- nothing else.Patel and Indira Gandhi had rightly banned it.They want to loot Hindus. They want to create unrest in India for their own interest.

    • मुँह में राम और बग़ल में नाथूराम रखने वाले यह लोग अपने एजेंडे में कभी भी सफल नहीं हो सकते हैं. हाँ,परेशानी ज़रूर हो सकती है परंतु देश के सामाजिक ताना-बाना को नुक़सान नहीं पहुँचा सकते हैं. बुरा तब लगता है जब संस्था भी संघ का साथ देने लगती है.

  2. पत्रकारिता का स्तर इतना घटिया और नीचा मैंने पूरी दुनिया में कही नहीं देखा जितना नीचा इन सब तूतपूँजियों ने किया हुआ है, ये सब जब तक अपना शो करते है बस अपने मन मर्ज़ी की बात करते है जिसका सच्चाई से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं होता,

    • अकील भाई, मीडिया में जो कुछ लोग हैं जब सत्ता के लिए और सरकार के लिए काम करने लगते हैं तो ऐसा लगता है कि ये सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं. अपने टी आर पी के लिए यह कुछ भी कर सकते हैं जिसका सच से कोई सम्बंध न भी हो वैसी ख़बरें चिपका सकते हैं

      • यह लोग झुट आज से नही बरसों से बोल कर मुल्क को बारुद के मुंह पर खड़ा कर चुके है कभी भी धमाके लिये आग भी यही लोग लगाएगें .अफशोस तो ईस बात का है की अवाम के समझ मे नही रही यह बात

  3. Re 50000 salary paane wala patrkaar Re 5 hundreds crore ke Chanel ka maalik kaise ho jaata hai ab pata chala.

    • सरोकारों को छोड़ कर जब भी कोई पत्रकार काम करता है वो पत्रकार नहीं दलाल बन जाता है,उसके बाद वह जो कमाता है वो नाम नहीं बदनाम ही होता है.

  4. क्या भारत के कानून को लिखने वाले पृष्ठ इतने महंगे हो गए कि ऐसे लोग लोकतंत्र की छाती पर चढ़ कर पूरे देश का मुँह चिढ़ा रहे हैं और आमजन इन के सामने अपने आप को बेबस पा रहा है!
    क्या भारत में तालिबान का शासन है, क्या एक अपराधी अपने द्वारा किए गए अपराध की जाँच खुद कर सकता है, क्या सिर्फ पुलिस द्वारा दर्ज किया गया मुकदमा ही देशद्रोह है, क्या सत्तासीन लोगों की सरपरस्ती में किए गए अपराध पर कानून पंगु हो जाता है….. ऐसे बहुत सारे प्रश्न आज भारत की प्रबुद्ध जनता के सामने है….???

    • जब मीडिया सत्ता पर सतर्कता से निगरानी न रखकर उसके साथ ही मिल जाती है तो यह समय खतरनाक हो जाती है, क्योकिं वर्तमान भारतीय परिदृश्य में मीडिया एक बड़ी भूमिका निभाती है.भारत जैसे विकाशशील देश में लोगों को जल्दी ही सच लगने लगता है जो मीडिया में बताया या दिखाया जाता है, हालाँकि कुछ आज के समय में मीडिया बहु कोणीय हुई है और कई तरह के नैरेटीव आ रहे हैं हैं पर जो काण्ड इन लोगों ने किया है वी निंदनीय है.जैसा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में यह बताया जा रहा है कि इसमें देशविरोधी नारे डाले गए थे. विश्वजीत दीपक ने भी यह दावा किया है जिसने z टी वी के प्रोड्यूसर के पद से इस्तीफा दिया है,जिसकी स्टोरी नौकरशाही ने भी की है.

  5. hahahahah ,ye naukarsahi.com congressi hai ye to savit ho gaya magar isme comment karne wale bhi sabhi sirf congressi he hai

    • देशप्रेमी साहेब, आपके परसेप्शन ने यह तय किया कि नौकरशाही किस पार्टी का है. आप सही नहीं हैं.

    • desh presmi apna name badalkar bhajpa premi rakh le

      yeha desh ki baat ho rahi hai ye gadha yha bhi politics le aaaya…

  6. Hame to pehle hi pta tha ye dokhebaj h media wale bIke hue h bjp ke hatho..i sport Ravish…

  7. In patarkaro ki ashliyat public ke samne lani hogi apna pet bharne ke liye yeh log kisi ko bhi dosi bna dete hai

  8. Agar media jhuti khabar dikhata raha to desh ko barbad kar dega aur desh ke vikas me sabse bada rora hai. Aur danga ka mahool banaya jata hai. Aise media par desh droh ka mukadma chalna hi chahiye. Makkar Aur jhute media aditar ko jel me dalo. Nahi to fansi do.

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