सृजन घोटाला एक्सक्लुसिव: इंकम टैक्स ने 2014 में ही घोटाले की सूचना बिहार सरकार को दे दी थी

नौकरशाही डॉट कॉम को एक दस्तावेज प्राप्त हुआ है जो प्रमाणित करता है कि मार्च-अप्रैल 2014 में ही सृजन घोटाले की जानकारी इंकम टैक्स विभाग ने बिहार सरकार के रजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसाइटी को दे दी थी. पढ़िये हमारे एडिटर इर्शादुल हक की रिपोर्ट 

इंकम टैक्स महकमे ने सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के आय-व्यय का इंवेस्टिगेशन किया था.महकमे के ज्वाइंट डायेक्टर अरविंद कुमार ने 26 मार्च 2014 को अपनी इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट को इंकम टैक्स महकमें के डायरेक्टर( इंवेस्टिगेशन), पटना को भेजी थी.

 

14 पेज की इस इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट में जो तथ्य और जानकारियां दी गयीं हैं, वह काफी गंभीर हैं. यह रिपोर्ट बताती है कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के पर्दे के पीछे करोड़ों रुपये का घोटाला उस समय तक हो चुका था. इस इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट में जिस तरह की जानकारियां और तथ्य सामने आये हैं उसकी गंभीरता को महकमें के आला अधिकारी यानी डायरेक्टर इंकमटैक्स( इंवेस्टिगेशन) ने बिना देर किये समझ लिया था. संभवत: यही कारण था कि डायरेक्टर इंकम टैक्स (इंवेस्टिगेशन), कुमार संजय ने रिपोर्ट प्राप्त होने के दूसरे ही दिन, यानी 27 मार्च 2014 को पूरी रिपोर्ट इंकम टैक्स के डायरेक्टर जनरल( इंवेस्टगेशन) को भेज दी थी.

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इस पूरी इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट की तथ्यात्मक बात यह थी कि इसमें सिफारिश की गयी है कि इस मामले को अविलंब रेजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसाइटी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी जाये ताकि को वह आपरेटिव सोसाइटी ऐक्ट 1935 के तहत आवश्यक ऐक्शन ले सके.

जाहिर है कि रेजिस्ट्रार कोआपरेटिव सोसाइटी, जो बिहार सरकार के सहकारिता विभाग के अधीन है, ने इस जानकारी को विभाग के प्रधान सचिव तक अविलम्ब दी होगी.

क्या है सृजन घोटाला

गौरतलब है कि सृजन घोटाला अगस्त के पहले हफ्ते में मुख्यमंत्री ने उजागर करने का दावा किया था. इसके बाद तत्काल तीन सदस्यों का एक जांच दल रातोंरात हेलिकॉप्टर से पटना से भागलपुर के लिए रवाना हो गया था. कई दिनों की जांच के बाद इस दल ने अलग अलग अधिकारियों, कर्मियों, बैंक के प्रबंधकों और सृजन के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. इस मामले में भागलपुर के जिला कल्याण पदाधिकारी, डीएम कार्यालय के अदीन काम करने वाले अनेक कर्मियों और बैंक के प्रबंधकों को गिरफ्तार कर लिया गया था.

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जांचकर्ताओं ने पाया था कि सृजन घोटाले का आकार एक हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है. मीडिया में लगातार आई खबरों और विपक्षी दलों के दबाव के बाद राज्य सरकार ने इस घोटाले को, राज्य की एजेंसियों से ले कर, केंद्रीय एजेंसी सीबीआई के हवाले कर दिया. सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है.

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याद रहे कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति का गठन मनोरमा देवी ने 1996 में किया था. इसने आरंभ में महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रूप के रूप में काम करना शुरू किया था. धीरे-धीरे इसकी पैठ अधिकारियों और नेताओं तक पहुंची. इसके बाद सरकारी धन का ट्रांस्फर सृजन के अकाउंट में किया जाने लगा. हालांकि सृजन को कोआपरेटिव बैंक की हैसियत से काम करने का अधिकार आरबीआई से प्राप्त नहीं था, लेकिन इसने इस कायदे का खुल कर उल्लंघन करना शुरू कर दिया था. इस घोटाले के बारे में आम लोगों को तब होने लगी जब, सृजन की संस्थापक मनोरमा देवी की मौत हो गयी.

डिसक्लेमर

नौकरशाही डॉट कॉम ने इस घोटाले की अनेक परतों को उधेड़ा है और कई प्रमाणिक दस्तावेज सार्वजनिक किया है. इस घोटाले का तार भागलपुर में करोड़ों रुपये के मॉल निर्माण करेने वाली कम्पनी से भी जुड़ा है, इसके भी पोख्ता सुबूत सामने आ चुके हैं. इस ममले में दिलचस्प बात यह है कि वह मॉल जिस जमीन पर बन रहा है उसके मालिक भाजपा के दुमका के सांसद निशिकांत दुबे हैं. हालांकि नौकरशाही डॉट इस बात का दावा नहीं करता कि निशिकांत दुबे को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर इस घोटाले का लाभ मिला है.

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इर्शादुल हक ने सिटी युनिवर्सिटी लंदन और बर्मिंघम युनिवर्सिटी इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त की.भारतीय जन संचार संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई की.फोर्ड फाउंडेशन के अंतरराष्ट्रीय फेलो रहे.बीबीसी के लिए लंदन और बिहार से सेवायें देने के अलावा तहलका समेत अनेक मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे.अभी नौकरशाही डॉट कॉम के सम्पादक हैं.

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