सेनारी नरसंहार के दस दोषियों का फांसी पर सवाल यह कि दोषियों के खिलाफ हाई कोर्ट में क्यों नहीं मिलते सुबूत?

बिहार के सेनारी नरसंहार मामले में जहानाबाद जिला कोर्ट के एडीजे थ्री रंजीत कुमार सिंह ने दस दोषियों को फांसी जबकि तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई. लेकिन चकित करने वाली बात है कि पिछले पांच नरंसहारों के मामले जब हाईकोर्ट पहुंचे तो इन गुनाहगारों के खिलाफ सुबूत तक नहीं मिले. अब इस मामल में क्या होगा. senari

इसके साथ ही तीन दोषी जिनको आजीवन कारावस की सजा सुनाई गई है पर एक-एक लाख रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया गया है.

 रणवीर सेना के मुलजिमों के खिलाफ क्यों नहीं मिले सुबूत

जिन लोगों को फांसी की सजा सुनायी गयी है उनमें बचेस सिंह, बुचन यादव, बुटाई यादव, सत्येंद्र दास, लल्लन पासी, गोपाल साव, दुखन पासवान, करीमन पासवान, जोराई पासवान, उमा पासवान के नाम शामिल हैं. कोर्ट ने इस नरसंहार और अपराध को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मानते हुए इन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई.

जबकि अरविंद कुमार, मुंगेश्वर यादव, विनय पासवान को उम्रकैद की सजा सुनाने के अलावा तीनों को एक-एक लाख रूपए का अर्थदंड भरना होगा.

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केस में दो दोषियों की सजा को रिजर्व रखा गया है क्योंकि बेल मिलने के बाद से दोनों फरार हैं. इस केस की सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर 15 लोगों को दोषी करार दिया था.

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सेनारी नरसंहार का मामला 18 मार्च 1999 को अंजाम दिया गया था इस घटना में 34 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. 18 मार्च की रात प्रतिबंधित एमसीसी के हथियारबंद उग्रवादी दस्ते ने गांव को चारों ओर से घेरने के बाद इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया था.

मारे गये सभी लोग एक खास जाति के थे.

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