सेना से जुड़ी प्रतीकों का इस्‍तेमाल किये तो होगी कार्रवाई

चुनाव आयोग ने रविवार को कहा कि जो राजनीतिक दल या उम्मीदवार अपने चुनाव प्रचार में सेना की तस्वीरों, वर्दी आदि का किसी भी प्रकार इस्तेमाल करेंगे, उनके खिलाफ आदर्श चुनाव आचार संहिता के तहत कार्रवाई की जायेगी।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए पत्रकारों के सवालों पर यह बात कही। श्री अरोड़ा ने कहा कि कल रात ही आयोग ने इस संबंध में एक निर्देश जारी किया है, जिसमें सेना की तस्वीरों का इस्तेमाल न करने की सलाह दी गयी है और वर्ष 2013 में भी ऐसे निर्देश जारी किये गये थे।

उन्होंने कहा कि यह आदर्श चुनाव संहिता आज से लागू हो गयी है और अब अगर कोई उम्मीदवार या दल ऐसा करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बाद आदर्श आचार चुनाव संहिता का उल्लंघन किये जाने पर पहले की तुलना में इस बार और बेहतर ढंग से कार्रवाई की जायेगी।

यह पूछे जाने पर कि सोशल मीडिया पर चुनाव के बारे में भ्रामक और गलत खबरें फैलाने तथा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए नफरत वाले पोस्ट डालने पर कैसे रोक लगायी जायेगी।  श्री अरोड़ा ने कहा कि सभी राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समाचार चैनलों की निगरानी की जायेगी और किसी सामग्री के आपत्तिजनक पाये जाने पर उसे संबद्ध अधिकारियों को भेजा जायेगा। फेसबुक, ट्विटर, गूगल, व्हाटस ऐप तथा शेयर चैट आदि सोशल साइट के बारे में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि वह इस संबंध में आयोग का सहयोग करेगी। इन सोशल प्लेटफार्म ने चुनाव आयोग की गतिविधियों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए जागरुकता अभियान शुरू कर दिया है। वे अपने उपयोग कर्ताओं को यह भी बता रहे हैं कि मतदान शुरू होने के 48 घंटे पहले की अवधि के दौरान किस तरह की सामग्री पोस्ट करना प्रतिबंधित है।

इन सभी प्लेटफार्म ने यह भी कहा है कि वे चुनाव के लिए शिकायत अधिकारी नियुक्त करेंगे और फेक न्यूज तथा आपत्तिजनक सामग्री की जांच करेंगे। यह कहे जाने पर कि फेसबुक और गुगल अगर आपकी बात नहीं मानता है तो क्या कार्रवाई करेंगे तो श्री अरोड़ा ने कहा है कि सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया पर इस तरह की दुष्प्रचार सामग्री पर रोक लगाने का कोई कानूनी अधिकार आयोग के पास नहीं है। इसके लिए एक समिति गठित की गयी थी, जिसने तीन माह पहले अपनी सिफारिश दी है और उसे कानून मंत्रालय के पास भेजा गया है। कानून मंत्रालय को इस पर अंतिम फैसला करना है।

इस सवाल पर कि पिछली बार लोकसभा चुनाव की घोषणा पांच मार्च को कर दी गयी थी जबकि इस बार इसकी घोषणा विलंब से की जा रही है, क्या इसका मकसद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन के लिए समय देना था, मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि ऐसी बात नहीं है क्योंकि पन्द्रहवीं लोकसभा का कार्यकाल 31 मई को समाप्त हो रहा था जबकि मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल तीन जून को समाप्त हो रहा है।

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