सैन्य बलों को टैक्स फ्री दारू: अदालत पहुंचा मामला

सैन्य बलों को मिलने वाली खाने-पीने की सामग्री पर सब्सिडी तो ठीक है पर उनके लिए टेक्स फ्री दारू का क्या कोई औचित्य है?rum

आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने इस मुद्दे को गंभीरतापूर्वक विचार किया है और सरकार द्वारा बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी जैसे अर्ध-सैनिक बलों में काफी सस्ती दरों पर दी जा रही शराब के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट, लखनऊ बेंच में पीआईएल दाखिल किया है.

पीआईएल में कहा गया है कि हम सैनिकों की मुश्किल परिस्थितियों और देश के प्रति इनके योगदान के मद्देनज़र इनके लिए खाद्य सामग्री, घरेलु सामानों आदि में छूट का स्वागत करते हैं वहीँ सरकारी टैक्स माफ करके सस्ती शराब दिये जाने का प्रबल विरोध करते हैं क्योंकि एक तो यह सरकारी धन का दुरुपयोग है, वहीं दूसरी ओर सस्ती शराब देने का कोई निश्चित कारण नहीं दिखता और इसके कई दुष्परिणाम अलग से दिख जाते हैं.

पीआईएल में पद के आधार पर सस्ती शराब दिये जाने पर भी प्रश्न उठाये गये हैं. सेना में अधीनस्थ अधिकारियों को महीने में 4 बोतल और वरिष्ठ अधिकारियों को पद के हिसाब से 10 या 14 बोतलें मिलती हैं. अमिताभ ठाकुर के अनुसार इस प्रकार का भेदभावपूर्ण वितरण यह साबित कर देता है कि सस्ती शराब किसी जरूरत के हिसाब से नहीं है बल्कि मात्र एक अतिरिक्त अवांछनीय लाभ है.

ठाकुर ने अफनी याचिका में कहा है कि एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा इस पूरे मामले का नए सिरे से अध्ययन कर इस अध्ययन के आधार पर सभी अनावश्यक सस्ती शराब का वितरण रोके लगायी जाये.

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