स्मृति ईरानी जी आपने महाझूठ बोल के देश के साथ दगा किया है

तो मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने इतना बड़ा झूठ बोला. इतना बड़ा तथ्यात्मक झूठ भारत के इतिहास में शायद ही किसी मंत्री ने बोला हो. उन्होंने मंत्रिपद की गरिमा को तार-तार कर दिया है.

 

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इर्शादुल हक, एडिटर, नौकरशाही डॉट इन

यह मामला हैदराब सेंट्रल युनिवर्सिटी के स्कॉलर रोहित वेमुला को युनिवर्सिटी से सस्पेंड किये जाने को ले कर है. वेमुला ने प्रताड़ना से तंग आ कर आत्महत्या कर ली थी. उससे पहले इस पीएचडी कर रहे छात्र को युनिवर्सिटी से निलंबित कर दिया गया था. आत्महत्या के बाद  जब विवाद गहराया तो स्मृति ईरानी ने बाजाब्ता प्रेस कांफ्रेंस कर ऐलान किया कि रोहित वेमुला के सस्पेंशन का फैसला जिस कमेटी ने की थी उसके प्रमुख खुद दलित प्रोफेसर थे.

 

ईरानी ने यह घोषणा करते हुए कहा कि मामले को दलित बनाम गैर दलित न बनाया जाये. उन्होंने रोहित को दलित के बजाये ओबीसी कहके भी मामले की तपिश को जातीय कवच से ढ़कने की कोशिश की. लेकिन अब हैदराबद सेंट्रल युनिवर्सिटी के दलित प्रोफेसरों ने ईरानी के इस झूठे बयान की बखिया उधेड़ दी है. दलित प्रोफेसरों ने एक आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी कर कहा है कि रोहित के निलंबंन की जांच करने वाली कमेटी का प्रमुख दलित नहीं था. रिलीज में कहा गया है कि जो जांच कर रहे थे वह उच्च जाति के सदस्य थे और एक्जिक्यूटिव काउंसिल की सब कमेटी में भी कोई दलित नहीं था.

बरखा दत्त से बात करते हुए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने कहा था कि “जांच कमेटी में कोई दलित सदस्य नहीं था इसलिए एक दलित प्रोफ़ेसर से राय ली गई थी. फैसला उनके अकेले का नहीं था, लेकिन यह नहीं कहा था कि जांच दल के प्रमुख दलित शिक्षक थे”.

ईरानी के महाझूठ की कलई युनिवर्सिटी के कुलपति के बयान से भी खुल गयी है. एनडीटीवी की कनसल्टिंग एडिटर बरखा दत्त से बात करते हुए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने कहा था कि “जांच कमेटी में कोई दलित सदस्य नहीं था इसलिए एक दलित प्रोफ़ेसर से राय ली गई थी. फैसला उनके अकेले का नहीं था, लेकिन यह नहीं कहा था कि जांच दल के प्रमुख दलित शिक्षक थे”.

यह गंभीर मामला है. रोहित को प्रताड़ित किये जाने. युनिवर्सिटी से निकाले जाने के बाद, छात्रों में आक्रोश थे. वे इसका विरोध कर रहे थे. इस मामले पर केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रय ने स्मृति ईरानी को पत्र लिख कर हस्तक्षेप करने और कथित राष्ट्र विरोध तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी. लेकिन हद तो तब हो गयी जब ईरानी ने दत्तात्रय को यादव बताते हुए कहा था कि वह खुद पिछड़ी जाति से हैं. बार बार जाति को उजागर करके ईरानी ने इसे जातिवादी कवच पहनाने की कोशिश की. माना कि दत्तात्रय यादव थे तो इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री क्यों करना चाहती थीं? क्या वह दलितों को पिछड़ों से भिड़ाने के लिए यह बयान नहीं दे रही थी?

ईरानी ने अपने इस बयान से अपने पद की गरिमा को तार तार कर दिया है. एक तो उन्होंने जिम्मेदार पद पर रह के तथ्यात्मक झूठ को स्थापित करने का दुस्साहस किया और दूसरे दत्तात्रय को यादव बता कर रोहित प्रकरण को जातिवादी रंग देने की कोशिश की.

एक कैबिनट स्तर की मंत्री ने अपने झूठे बयान से देश के साथ दगा किया है.

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