हाथ का साथ छोडऩे की तैयारी में पवार

तीसरे मोरचे की मुलायम और वामदलों की कवायद दिखाने लगी है रंग, चुनाव के बहाने समन्वय समिति की बैठक बुलाने का अल्टीमेटमsharadpawar

अरुण सिंह, नयी दिल्ली से

शरद पवार और मुलायम सिंह यादव की दोस्ती जग जाहिर है. वामदलों के साथ मुलायम के रिश्ते भी बेहद मधुर हैं. तीसरे मोरचे की कवायद में वाम नेता पहले से ही जुटे हैं. हकीकत ये भी है कि बिना मुलायम के तीसरा मोरचा बन नहीं सकता. लिहाजा एक सोची समझी रणनीति के तहत मुलायम की पार्टी सपा ने यूपीए 2 के चार साल पूरे होने पर जश्न से किनारा करना जरूरी समझा. अब शरद पवार की पार्टी भी इसी रास्ते पर है.

एनसीपी चाहती है कि तुरंत या तो समन्वय समिति की बैठक बुलाई जाए अन्यथा वो दूसरा रास्ता अख्तियार कर सकती है. दरअसल शरद पवार की निगाह आम चुनाव के साथ-साथ महाराष्ट्र के चुनाव पर भी है. इसी वजह से सारे कील कांटे पवार दुरुस्त करना चाह रहे हैं.
एनसीपी के प्रवक्ता डी. पी. त्रिपाठी ने कहा कि हम चाहते हैं कि बैठक तुरंत बुलाई जाए, जिससे हम चुनावी रणनीति के साथ-साथ अपने गठबंधन की मजबूती पर चर्चा कर सकें. त्रिपाठी का कहना था कि देश में आम चुनाव का माहौल बनना शुरू हो गया है, इसे देखते हुए चुनावी रणनीति पर काम करने का यह बिल्कुल माकूल वक्त है.

त्रिपाठी ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि केवल यूपीए में बने रहना एनसीपी का ही गर्ज नहीं है. सबसे बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस को ये देखना होगा कि आखिर सहयोगी क्यों नाराज होकर जा रहे हैं? सब साथ छोड़ते जा रहे हैं,जो साथ हैं उनकी अगर कद्र नहीं होगी तो फिर हमारे सामने इसके अलावा क्या चारा होगा कि हम भी भावी रणनीति तय करें.
केंद्र में यूपीए सरकार के संख्या बल को अगर टटोला जाए तो साफ है कि अगर सपा और एनसीपी समर्थन वापस ले लेते हैं तो सरकार गिर जाएगी.

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