धार्मिक अधिकार पर अदालती फैसले की रिपोर्टंग: सम्पादक बतायें यह कैसी खबरनवीसी है

बिहार के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले अखबार की खबरनवीसी का यह नमूना है. पटना हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा नये धर्म को स्वीकार करने के उसके अधिकार को जायज ठहराते हुए उसके पक्ष में फैसला दिया. लेकिन महिला के नाम को अखबार ने खबर से उड़ा दिया.

नौकरशाही डेस्क

पत्रकारिता का बुनियाद उसूल 5W one H के बारे में हर पत्रकार को प्रशिक्षित किया जाता है. यानी खबर पढने से पाठक के तमाम दिज्ञासा का जवाब मिलना अनिवार्य शर्त है. यानी कौन, कब, कहां, क्यों और कैसे. लेकिन हिंदुस्तान ने इस खबर में महिला का नाम  इरादतन छुपाया है. इसके पीछे उसकी क्या मंशा है.

गौरतलब है कि एक महिला ने नये धर्म को स्वीकार कर लिया. उसके परिवार वालों ने इसका विरोध किया और जान मारने की धमकी दी. महिला ने अपनी धार्मिक स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी. तब पटना हाई कोर्ट ने उसके फैसले को सही होने की मुहर लगायी.

अखबार के 25 जुलाई, 017 के पटना एडिशन के पेज नम्बर 4 पर यह खबर है. खबर में सारी जानकारी दी गयी है. जैसे- औरंगाबाद की महिला ने 2014 में धर्म परिवर्तन कर लिया. और नये धर्म के अनुसार आचरण करने लगी. जबकि इसकी जानकारी महिला के पति और रिश्तेदारों को हुई तो उन्होंने इसका विरोध किया. महिला को जान से मारने की धमकी दी गयी. इस पर महिला ने जिले की पुलिस में शिकायत की तो उसे रिमांड होम भेज दिया गया. इस बीच महिला ने अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए अदलात का दरवाजा खटखटाया.

कानूनी लड़ाई के बाद पटना हाई कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला दिया और कहा कि हर व्यस्क को यह अधिकार है कि वह अपनी मर्जी से किसी भी धर्म के अनुकूल आचरण कर सकता है.

ऐसे में सवाल है कि हिंदुस्तान के एडिटर डेस्क ने उस महिला के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के हर पक्ष का जिक्र किया. पर उसका नाम छुपा लिया. ऐसा नहीं है कि खबरनवीस ने महिला का नाम नहीं लिखा होगा. खबर को पढने से यह स्पष्ट हो जाता है कि संपादन करते वक्त उस महिला के नाम को डिलिट कर दिया गया. यह मान भी लिया जाये कि खबरनवीस ने नाम नहीं लिखा होगा तो आखिरी जिम्मेदारी संपादन करने वाले पत्रकार थी कि वह पत्रकारिता के बुनियादी शर्त का पालन करे.

पत्रकारिता में यूं तो कुछ नैतिक इथिक्स है. जिसमें खास तौर पर महिला के साथ रेप हो या उसकी अस्मिता पर आंच आये हो तो ऐसी स्थिति में उसके सम्मान की रक्षा के लिए महिला का नाम गुप्त रखा जाता है. लेकिन इस खबर में महिला की धार्मिक आजादी प्राप्त करने के उसके संघर्ष और उसके शौर्य की कहानी है. इसके बावजूद उस महिला का नाम छुपाया गया है.

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