हिरासत में मौतें: बिहार ने सुधारी अपनी इमेज

पिछले आठ सालों में बिहार में पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में बिहार ने अपनी छवि सुधारी है.

हिरासत में हिंसा

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विनायक विजेता

बिहार के मानवाधिकार आयोग ने नेशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट मीडिया को जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार 2005-10 के दौरान जहां बिहार में पुलिस हिरासत में 20 मौतें हुई वहीं 2011- 2012 के दरम्यान सिर्फ दो लोगों की मौत हिरासत में हुई. इनमें एक की मौत 2011 में और एक की मौत 2012 में हुई.

बिहार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी नील मणि ने यह रिपोर्ट मीडिया को भेजी है.

पुलिस हिरासत में हुई मौत मामले में बिहार केरल के साथ संयुक्त रुप से 14वें पायदान पर है. बिहार और केरल में 2005 से 2012 के बीच हुई 22-22 लोगों की हिरासत में मौतें हुई हैं.

राज्य के पूर्व डीजीपी तथा राज्य मानवाधिकार आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष नीलमणि ने बताया की वर्ष 1994 से 2005 के बीच बिहार में 86 लोगों की मौत पुलिस हिरासत में हुई थी. लेकिन ताजा आंकड़े के मुताबिक हिरासत में सबसे ज्यादा मौतें महाराष्ट्र में होती हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है जबकि गुजरात तीसरे नम्बर पर है.

इस मामले में महारास्ट आव्वल नम्बर पर है. 2005 से 2012 के बीच महाराष्ट में 169, उत्तरप्रदेश में 122, आंध्रप्रदेश में 91, तमिलनाडु में 74, असम में 51, मध्यप्रदेश में 49, पश्चिम बंगाल में 37, पंजाब में 29, हरियाणा में 28, कर्नाटक में 24 एवं राजस्थान में 23 वक्तियों की मौत पुलिस हिरासत में हुई.

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