10 जवानों को मौत के घात उतारने वाले माओवादियों ने कहा अभी करेंगे और हमला

सासेमवार को गया-औरंगाबाद सीमा पर डुमरी नाला के पास सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के 10 जवानों को बारुदी सुरंग से उड़ाने के मामले की जिम्मेवारी प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन ने लेते हए कहा है कि अगर सरकार ऑपरेशन ग्रीन हंट बंद नहीं करेगी तो संगठन इससे भी बड़ा हमला करेगी।

सांकेतिक फोटो

सांकेतिक फोटो

विनायक विजेता

प्रतिबंधित संगठन के मगध जोन के प्रवक्ता परमजीत ने यह स्वीकार किया कि संगठन की कार्यवाई के बाद सीआरपीएफ की जवाबी कार्यवाई में संगठन के तीन और एक ग्रामीण मारा गया।

 

बिहार और झारखंड पुलिस के लिए मोस्ट वांटेड परमजीत जिसकी खोज अरसे से सीआरपीएफ भी कर रही है ने दावा है किया है कि सीआरपीएफ की गोली से उसके संगठन के सदस्य आमस थाना के भूपनगर निवासी जीतेन्द्र उर्फ बॉस उर्फ प्रिंस और बाराचट्टी व लोहरदग्गा निवासी दो सदस्य मारे गए जबकि चौथा व्यक्ति संगठन का सदस्य न होकर एक ग्रामीण था। परमजीत ने दावा किया कि मुटभेड़ के बाद सीआरपीएफ के जवान घंटों तक अपने मृत साथी की लाश के पास इसलिए नहीं गए कि उन्हें यह डर था कि कहीं पूर्व की तरह उनके मृत साथी के पेट में भी कहीं विस्फोटक तो नहीं लगा दिया गया हो। हालांकि प्रतिबंधित संगठन के मगध जोन के प्रवक्ता परमजीत के इस दावे में कितनी सच्चाई है इस संदर्भ में देर रात जब मैंने पुलिस प्रमुख पी के ठाकुर और आईजी ऑपरेशन कुंदन कृष्णन से उनके मोबाइल नंबर पर बात करने की कोशिश की तो दोनों में से किसी अधिकारियों ने फोन रिसिव नहीं किया।

माओवादी परमजीत ने ली हमले की जिम्मेदारी

जाहिर है सोमवार की शाम से ही गया जाकर सर्च ऑपरेशन की अगुवाई कर रहे कुंदन कृष्णन का देर रात तक थके होना लाजिमी है जबकि डीजीपी पर भी कई तरह की जिम्मेवारियां हैं। पर जिस तरह परमजीत ने खुली चुनौती दे डाली है वह बिहार पुलिस के साथ सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के लिए भी एक खुली चुनौती है कि वह अपने शहीद हुए साथियों का बदला माओवादियों से किस तरह लेती है।

 

सूत्रों के अनुसार सीआरपीएफ के कई जवानों की हत्या का जिम्मेवार परमजीत सिंह मूल रुप से बिहार के जहानाबाद जिले के सिकरिया गांव का निवासी है जिसके पिता भी कभी एक लाख के इनामी नक्सली रह चुके हैं। इसी गांव के बगल का निवासी देवकुमार उर्फ अरविंद भाकपा माओवादी संगठन का शीर्ष नेता तथा संगठन के पोलित ब्यूरो का अहम सदस्य होने के साथ गुरिल्ला आर्मी दस्ते का बिहार-झारखंड का भी नीति निर्धारक है जो झारखंड के गढ़वा और पलामू में रहकर संगठन के मारक दस्ते को संचालित करता है। कुछ वर्ष पूर्व जहानाबाद जेल ब्रेक की घटना अरविंद की अगुवाई में ही अंजाम दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*