101 पूर्व नौकरशाहों ने मुख्यमंत्रियों को चेताया- कोरोना पर मुसलमानों से नफरत भड़काना महंगा पड़ेगा

देश के नामचीन 101 पूर्व नौकरशाहों ने मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर चेतावनी दी है कि कोरोना पर मुसलमानों के खिलाफ नफरत भड़काने की रणनीति देश को भारी कीमत के रूप में चुकानी पड़ेगी.

101 पूर्व नौकरशाहों ने पत्र में कहा है कि देश के कुछ हिस्सों में मुसलमानों का ‘उत्पीड़न’ हो रहा है। उन्होंने पत्र में तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन को तो ‘गुमराह और निंदनीय’ बताया, लेकिन मीडिया के कुछ वर्ग पर मुसलमानों के खिलाफ विद्वेष भड़काने का आरोप लगाकर उसके काम को ‘बिल्कुल गैर-जिम्मेदाराना और कलंकित’ करार दे दिया। पत्र में कहा गया है, ‘महामारी के कारण पैदा हुए डर और असुरक्षा को विभिन्न जगहों पर मुसलमानों को ‘अलग-थलग करने’ के प्रति मोड़ दिया गया ताकि शेष आबादी की सुरक्षा के नाम पर उन्हें सार्वजनिक स्थलों से दूर रख जा सके।’

कौन हैं ये नौकरशाह


ये 101 पूर्व नौकरशाह पूरे देश और केंद्रीय सेवाओं से जुड़े हैं और देशभर से हैं। उनका दावा है कि ‘वो किसी खास राजनीतिक विचारधारा से संबद्ध नहीं हैं, लेकिन भारतीय संविधान को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर उनका ध्यान जरूर रहता है।’ चिट्ठी लिखने वालों में पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, पूर्व आईपीएस ऑफिसर ए एस दुलत और जुलियो रिबेरो, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एस वाई कुरैशी शामिल हैं।


उन्होंने मुख्यमंत्रियों के नाम लिखे खुले पत्र में कहा कि पूरा देश अप्रत्याशित पीड़ा से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम इस महामारी से मिली पीड़ा सहकर और अपनी जान बचाकर चुनौतियों से तभी निपट सकते हैं जब एकजुट रहें और एक-दूसरे की मदद करें।’ उन्होंने उन मुख्यमंत्रियों की सराहना की जिन्होंने सामान्य परिस्थितियों में और खास तौर से इस महामारी से निपटते हुए अपनी धर्मनिरपेक्ष पहचान कायम रखी है।

मीडिया की भूमिका चिंताजनक

पत्र में कहा गया है, ‘बहुत दुख के साथ आपके ध्यान में खासकर नई दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में मार्च महीने में तबलीगी जमात की मीटिंग के बाद देश के कुछ हिस्सों में मुसलमानों के उत्पीड़न की खबरें लाना चाहता हूं।’ नौकरशाहों ने कहा कि देश में कोविड-19 केस उभरने लगे तो सोशल डिस्टैंसिंग के सिद्धांत को नजरअंदाज करने के लिए जमात की आलोचना हुई। हालांकि, मीडिया के कुछ वर्ग ने बाकी सभी राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों को छोड़कर सिर्फ इसी घटना के परिप्रेक्ष्य में कोविड-19 को सांप्रदायिक रंग देने में जल्दबाजी दिखाई। मीडिया ने यह भी कहा कि तबलीगी जमात की मंशा देशभर में वायरस फैलाने की है।



कहा- मुसलमानों को नहीं दी जा रही है सरकारी राहतउन्होंने कहा, ‘इससे भी बड़े दुख की बात यह है कि कई जगहों पर ऐसी अफवाह भी फैलाई गई कि मुसलमान अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से भाग रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि कई जगहों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार की ओर से विशेष राहत सुविधाओं से भी मुसलमान परिवारों को वंचित किया जा रहा है। नौकरशाहों ने मुख्यमंत्रियों से कहा, ‘हम सब आपसे राज्य में सभी लोगों से सोशल डिस्टैंसिंग, चेहरा ढंकने और हाथ धोने जैसे निर्देशों को पालन सुनिश्चित करवाने की अपील करते हैं। साथ ही उन अफवाहों के खंडन की भी जरूरत है कि हमारे देश में किसी खास समूह में ज्यादा संक्रमण है।’

मुस्लिम देशों की चिंता

मुस्लिम देशों में भारतीयों को हो सकती ही दिक्कतपूर्व नौकरशाहों ने कहा कि पारंपरिक तौर पर भारत से मित्रवत संबंध रखने वाले कुछ मुस्लिम देशों ने हालिया घटनाओं पर गंभीर चिंता प्रकट की है। उन्होंने लिखा, ‘लाखों भारतीय दूसरे देशों में रहते हैं और नौकरी करते हैं। हमें अपने गैर-भेदभावकारी पहलों और राहत कार्यों से सुनिश्चित करना होगा कि भारत में अल्पसंख्यकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। इससे उन देश आश्वस्त हो पाएंगे और वहां अच्छी-खासी संख्या में रह रहे भारतीयों को प्रतिक्रिया स्वरूप संभावित नुकसान से बचा पाएंगे।’

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