15 अगस्त को दलितों की हत्या: हिंदी अखबारों का रुख

आजादी के दिन यानी 15 अगस्त को रोहतास में झंडा फहराने के लिए 3 दलितों की हत्या और तीन दर्जन घायलों की खबर पर बिहार के हिंदी अखबारों का क्या रवैया रहा?

दैनिक जागरण

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बिहार के दूसरे सबसे बड़े अखबार दैनिक जागरण ने इस खबर को 13वे नम्बर पेज पर नीचे जगह दी है. अखबार की इस खबर में तथ्यों को देखने से लगता है कि इसने भ्रम फैलाने की कोशिश की है. इस अखबार का शीर्षक है- “झंडोत्तोलन को ले दो गुट भिड़े, एक की मौत”.

जागरण लिखता है “स्वतंत्रता दिवस के दिन झंडोत्तोलन के दौरान दो गुटों में हिंसक झड़प हो गई. जिसमें एक अधेड़ रामविलास की मौत हो गई जबकि दोनों पक्षों के 42 लोग घायल हैं”. अखबार ने ‘विलास राम’ की जगह ‘राम विलास’ लिखा है. नाम के आगे ‘राम’ और नाम के पीछे ‘राम’ लिखे जाने का फर्क आम आदमी भी समझता है.

हिंदु्सतान

हिंदुस्तान ने इस खबर को 18 नम्बर पेज पर जगह दी है वो भी पांचवी खबर के रूप में.बिना तस्वीर की इस खबर में हिंदुस्तान लिखता है कि इस घटना में एक व्यक्ति राम विलास राम की मौत हो गयी जबकि 50 लोग घायल हुए हैं जिनमें 15 की हालत नाजुक है.

हिंदुस्तान ने इसी पेज पर पांच कॉलम की खबर छापी है जिसका शीर्षक दिया है पीएमसीएच की इमर्जेंसी में भर्ती गर्भवती की हालत गंभीर. चम्पा देवी नाम की यह महिला रोहतास हिंसा की शिकार हो गयी थी.

प्रभात खबर

प्रभात खबर ने इस रिपोर्ट को 13 नम्बर पेज पर जगह दी है. लेकिन इस अखबार ने भी इस खबर को लीड नहीं बनाया. इस पेज पर पहली खबर के रूप में भाजपा के कार्यक्रम की खबर छापी है- “फिर से लौट रहा है जंगल राज”. हां पर इस अखबार ने संबंधित तस्वीर के साथ एक जख्मी तेज राम का बयान छापा है.

अखबार के अनुसार तेज कहते हैं “जिस जगह पर घटना हुई, वहां रविदास जी की मूर्ति है. हर साल वहां झंडा फहराने को लेकर दबंगों द्वारा दबाव दिया जाता है. इस बार भी दोनों पक्षों में प्रशासन की पहल पर समझौता हुआ और हम लोगों ने समझौते के तहत झंडा फहराने का निर्णय का त्याग कर दिया. सुबह में सभी लोग परिसर में जमा थे. इसी बीच दबंग पुलिस के साथ पहुंचे और हमला कर दिया”.

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